फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

येदियुरप्पा के अध्यक्ष होने से सिर्फ कांग्रेस ही नहीं खुद पार्टी के नेता भी परेशान!

Sat, 09 Apr 2016 07:24 PM IST
इमरान क़ुरैशी/ बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
विज्ञापन
- फोटो : BBC
विज्ञापन
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाने से न केवल सत्तारूढ़ कांग्रेस निराश है बल्कि खुद उनकी पार्टी के नेता भी कुछ परेशान हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा। लेकिन येदियुरप्पा के दिमाग में कोई उलझन नहीं। बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''स्वाभाविक तौर जो प्रदेश अध्यक्ष बनता है और पार्टी को सत्ता दिलाता है वही मुख्यमंत्री बनेगा।" लेकिन अगले दो साल में येदियुरप्पा 75 वर्ष के हो जाएंगे और उन्हें भी लालकृष्ण आडवाणी और दूसरे बुज़ुर्ग नेताओं की तरह मार्गदर्शक मंडल में भेजा जाएगा।
विज्ञापन


इस बारे में येदियुरप्पा कहते हैं, "हां मैं 75 साल का हो जाऊँगा, लेकिन मैं 85 साल तक काम करता रहूँगा। मेरी पार्टी का नेतृत्व जानता है कि मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ और हमेशा यात्रा करता रहता हूँ। उम्र मेरे लिए मायने नहीं रखती।" क्या उन्हें पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री बनाने का आश्वासन मिला है, इस बारे में पूछने पर येदियुरप्पा कुछ कहने से मना कर देते हैं।

कर्नाटक में येदियुरप्पा का कद बड़ा होने की कई वजहें हैं। उनके नेतृत्व में ही भाजपा को साल 2008 के विधानसभा चुनाव में जीत मिली थी और वह कर्नाटक में पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने थे।
विज्ञापन


कर्नाटक भाजपा के लिए दक्षिण का द्वार बन गया था लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्हें साढ़े तीन साल में ही अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। अवैध खनन मामले में लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े की एक रिपोर्ट में येदियुरप्पा, उनके मंत्री जनार्दन रेड्डी और उनके कुछ सहयोगियों का नाम आया था। यह रिपोर्ट 16,085 करोड़ रुपए के अवैध खनन घोटाले से संबंधित थी।

कुर्सी गंवाने के बाद येदियुरप्पा ने अपने उत्तराधिकारी सदानंद गौड़ा को भी लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहने दिया। गौड़ा फिलहाल केंद्रीय कानून मंत्री हैं। येदियुरप्पा ने बाद में अपने एक अन्य समर्थक जगदीश शेट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। कुछ दिन बाद उन्होंने एक अलग क्षेत्रीय पार्टी बना ली थी। इस पार्टी को साल 2013 के विधानसभा चुनाव में आश्चर्यजनक रूप से 10 फीसदी वोट मिले और भाजपा की हार सुनिश्चित हो गई थी।

एक साल बाद लोकसभा चुनाव के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी येदियुरप्पा को पार्टी में वापस लाए और नतीजा यह हुआ कि कर्नाटक में भाजपा को दोतिहाई सीटें मिलीं। पिछले छह साल में येदियुरप्पा के खिलाफ जमीन के पट्टे रद्द करने और सत्ता के दुरुपयोग के लगभग 40 मामले अमान्य या खारिज कर दिए गए। येदियुरप्पा के खिलाफ अभी तीन मामले उच्च न्यायालय और एक मामला सत्र अदालत में लंबित है।

येदियुरप्पा के वकीलों को भरोसा है कि वे इन मामलों में 'बेगुनाह' साबित होंगे। राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर हरीश रामास्वामी कहते हैं, "कर्नाटक में आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले कई नेता हैं, लेकिन येदियुरप्पा अलग हैं क्योंकि उन्होंने राज्य में पार्टी को खड़ा किया है। उनका जनाधार बहुत अच्छा है और वह अगड़े लिंगायत समुदाय से हैं। उन्हें इसलिए प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है क्योंकि पार्टी के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।" 

वरिष्ठ पत्रकार और समीक्षक मदन मोहन भी सहमत हैं कि भाजपा के पास कर्नाटक में येदियुरप्पा के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। लेकिन फिर भी वह सवाल उठाते हैं कि 'क्या येदियुरप्पा नतीजे दे पाएंगे।'

लगता है भारतीय जनता पार्टी जिस बात पर ध्यान नहीं दे रही है, वो यह है कि हर चुनाव में मतदाता सूची में लगभग 30-40 लाख नए मतदाता जुड़ते हैं और ये वो मतदाता होते हैं जो येदियुरप्पा के जातिगत समूह को देखे बगैर वोट डालते हैं। मदन मोहन मानते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व ने 'पैनिक बटन' दबा दिया है क्योंकि राज्य में पार्टी नेतृत्व की मौजूदा खेप में किसी दूसरे नेता के पास राज्यव्यापी जनाधार नहीं है। लेकिन येदियुरप्पा की नियुक्ति से दूसरे नेताओं को आशंका है कि उन्हें हाशिए पर धकेला जा सकता है।

पार्टी के एक नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, "हम जानते हैं कि वह लंबे समय तक लोगों के प्रति पूर्वाग्रह को भुलाते नहीं हैं। पार्टी में कुछ समानांतर गतिविधियां भी होंगी। हम यह भी जानते हैं कि इस तरह के बर्ताव ने बिहार और दिल्ली में पार्टी का क्या हाल किया?" दिल्ली से लौटने के बाद येदियुरप्पा ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो बयान पढ़ा, उसमें यह बात भी शामिल थी, ''मैं अपने सभी सहयोगियों को भरोसे में लूंगा और उनकी उम्मीद के मुताबिक काम करूँगा। हमारी पार्टी में कोई मतभेद नहीं है।'' भाजपा के ही एक अन्य नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ''पार्टी के भीतर वह जो कुछ भी हों, कांग्रेस सरकार को चैन से सोने नहीं देंगे। उनका मकसद कर्नाटक को कांग्रेस मुक्त बनाना है।''
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें