उत्तरप्रदेश में सरकार बदलने के साथ ही अब पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां के चहेते अफसरों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। कई अफसरों की रामपुर से वापसी की उम्मीद टूटी है। वहीं, कई ने तो अपना बोरिया-बिस्तर बांधना शुरू कर दिया है। प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भाजपा की सरकार आ गई है।
हालांकि अभी सरकार का गठन होना बाकी है लेकिन सरकारी सिस्टम में तैनात अफसरों खासतौर से उन अफसरों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, जो आजम खां के करीबी माने जाते हैं, जबकि कुछ अफसर चुनाव आयोग के डंडे का शिकार हो चुके हैं।
वह उम्मीद के संग दूसरे जनपदों में चले गए कि सरकार आने के बाद वापस आ जाएंगे लेकिन अब भाजपा की सरकार आने के बाद उन अफसरों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सपा सरकार के वापस आने की उम्मीद लगाए बैठे अफसरों को अब झटका लगा है। फिलहाल सपा के चहेते अफसरों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अफसरों ने बोरिया बिस्तरा बांधना शुरू कर दिया है।
जल निगम के कई निर्माण अधिकारी भी आ सकते हैं निशाने पर
आजम खान
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इनकी वापसी की उम्मीद टूटी
डीएम रहे अमित किशोर, एसपी रहीं साधना गोस्वामी, सीओ सिटी रहे आले हसन, एडीएम प्रशासन रहे मदन गर्बियाल, बीएसए एसके तिवारी, तहसीलदार सदर अमित भारतीय, एआरटीओ प्रवर्तन केपी सिंह यादव।
इनका जाना है तय
डीएम डॉ. राजशेखर, एसपी केशव कुमार चौधरी, एडीएम प्रशासन उमेश कुमार मंगला, एडीएम वित्त एमपी सिंह, एएसपी मोहम्मद तारिक, सीडीओ भानु प्रताप सिंह, डीआरडीए के परियोजना अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद, डीपीआरओ परवेज आलम, सीएमओ डॉ. एसएल सारस्वत।
नई सरकार बनने के बाद जल निगम के कई इकाइयों के अफसर भी सरकार के निशाने पर आ सकते हैं। जल निगम का विभाग नगर विकास मंत्री आजम खां के पास रहा है। विकास कार्यों के दौरान कई इकाइयों को रामपुर लाया गया था। इस दौरान ई अफसर आजम के करीबी रहे। अब यह अफसर भी निशाने पर आ सकते हैं।