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Azadi Ka Amrit Mahotsav: तिलक से लेकर नेहरू तक, जानें किस हाल में हैं आजादी के इन पांच महानायकों के जन्मस्थान

Mon, 15 Aug 2022 12:04 AM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Azadi ka Amrit Mahotsav: आजादी के अमृतकाल का जश्न बीते एक साल से चल रहा है। इस दौरान अमर उजाला ने आजादी के नायकों, उनकी विरासत और स्मृतियों से पाठकों को रूबरू कराने की कोशिश की। पढ़िए ऐसे ही पांच नायकों के जन्मस्थान से की गईं पांच रिपोर्ट…
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आजादी का अमृत महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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15 अगस्त को देश की आजादी को 75 साल पूरे हो जाएंगे। आजादी के अमृतकाल का जश्न बीते एक साल से चल रहा है। इस दौरान अमर उजाला ने आजादी के नायकों, उनकी विरासत और स्मृतियों से पाठकों को रूबरू कराने की कोशिश की। आजादी के वो नायक जिन्होंने देश का आजाद कराने के लिए अपना जीवन दिया। 

इस अहम अभियान के तहत अमर उजाला ने अपने प्रतिनिधियों को देशभर में भेजा। हमारे प्रतिनिधि आजादी के नायकों के जन्मस्थान गए। पढ़िए ऐसे ही पांच नायकों के जन्मस्थान से की गईं पांच रिपोर्ट…

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बाल की जन्मस्थली के भाल पर तरक्की के ‘तिलक’ की दरकार

बाल गंगाधर तिलक पुण्यतिथि - फोटो : Facebook

 रत्नगिरी, भारतीय क्रंति के जनक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक  की जन्मस्थली। तिलक जो महात्मा गांधी के आंदोलन शुरू होने से पहले सबसे बड़े नेता थे। तिलक जिन्होंने एनी बेसेंट की मदद से होम रूल लीग की स्थापना की थी। वही, होम रूल आंदोलन जिसके कारण ही तिलक को लोकमान्य की उपाधि मिली। बीते मार्च महीने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जन्मस्थली पहुंचा। महात्मा गांधी ने जिन्हें आधुनिक भारत का निर्मात कहा था, खुद उनकी जन्मस्थली विकास को तरस रह रही है। पढ़िए डॉक्टर विनोद पुरोहित की रिपोर्ट... 

 

संघर्षों की झलक है बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की जन्मस्थली

बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर। - फोटो : Amar Ujala

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से लगभग 23 किलोमीटर दूर पुराने आगरा-मुंबई मार्ग पर महू छावनी है। यहीं 130 साल पहले डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का जन्म हुआ था। आंबेडकर यहां आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। खपरैल के जिस क्वार्टर में आंबेडकर का जन्म हुआ वो आज भव्य स्मारक का स्वरूप ले चुका है। आज ये स्माकर करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। ये स्थल शिक्षा, संगठन और संघर्ष की भी प्रेरणा देता है। पढ़िए राजेंद्र सिंह की रिपोर्ट…

 


 

किराना वाले की चाबी से खुलती है सरदार पटेल की दुनिया...

सरदार पटेल का देसाई वगो स्थित जन्मस्थान। - फोटो : Amar Ujala

अखंड भारत के शिल्पी सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मस्थल नडियाद है। जिस मकान में उनका जन्म हुआ, वहां आज ताला लगा रहता है। उनके जन्मस्थान से तीन मकान छोड़कर किराने की एक दुकान है। इसी दुकानवाले की चाबी से सरदार पटेल की दुनिया खुलती और दिखती है। इस दुकानदार के नहीं होने पर आप पटेल का जन्मस्थान नहीं देख पाएंगे। नर्मदा के किनारे भले पटेल की आकाश छूती प्रतिमा बना दी गई हो, लेकिन उनका जन्मस्थान जर्जर हालत में है। बीते साल सितंबर में अमर उजाला पटेल के जन्मस्थल नडियाद पहुंचा था। पढ़ें विजय त्रिपाठी की रिपोर्ट… 

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जन्मस्थली में सहेजी गई विरासत

इसी कमरे में नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म हुआ था। दूसरे चित्र में संग्रहालय में मौजूद उस दौर की बग्घी। - फोटो : Amar Ujala

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को देश का नामचीन वकील जानकीनाथ बोस के घर हुआ था। ओडिशा के कटक शहर में स्थिति सुभाष का जन्मस्थान अब म्यूजियम में तब्दील हो चुका है। नेताजी के घर जानकीभवन को 2004 में सरकार ने नेताजी जन्मस्थान संग्रहालय बना दिया था। इस संग्रहालय में जाकर आप सुभाष के जीवन से जुड़े कई अनसुने पहलुओं से रूबरू होते हैं। पढ़िए नेताजी की जन्मस्थली से नितिन यादव की रिपोर्ट… 

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अपने ही शहर में नेहरू की छाप आसानी से ढूंढे नहीं मिलती

पंडित जवाहर लाल नेहरू - फोटो : Amar Ujala

 इलाहाबाद, जिसे चंद साल पहले ही प्रयागराज नाम मिला है। वो शहर जो देश के पहले प्रधानमंत्री की जन्मस्थली है। उसी शहर में अब नेहरू अजनबी से हो गए हैं। जो आनंद भवन कभी आजादी की लड़ाई का केंद्र रहा, उसकी चमक भी अब फीकी पड़ चुकी है। नेहरू के बहुआयामी व्यक्तित्व की कोई छाप इस शहर में आसानी से ढूंढे नहीं मिलती है। यहां तक कि नेहरू के जन्मस्थान के ध्वंसावशेष भी शेष नहीं हैं।  पढ़िए मनोज मिश्र की रिपोर्ट...

इन महापुरुषों की जन्मस्थली भी पहुंचा अमर उजाला…

  1. सावरकर के जन्मस्थान का हाल जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट
  2. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मस्थान का हाल जानने के लिए यह रिपोर्ट पढ़ें  
  3.  जननायक गोपीनाथ बोरदोलोई के जन्मस्थान का हाल जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट
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