आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में सबसे ज्यादा लाभ पुरुषों को मिला है। क्लेम लेने वालों में पुरुष लाभार्थियों का औसत 58 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की औसत 42 प्रतिशत रहा। अकेला बिहार ही ऐसा राज्य रहा जहां महिलाओं ने इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ उठाया। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार योजना के लाभार्थियों के बीच स्त्री-पुरुष का भेदभाव खत्म करने को लेकर अभियान शुरू करे।
असम-त्रिपुरा टॉप पर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी से 23 सितंबर से लेकर 26 अक्टूबर तक मिले आंकड़ों के मुताबिक 2 लाख 85 हजार 300 लाभार्थियों में से 58 फीसदी पुरुष हैं, जबकि 42 फीसदी महिलाएं हैं। आंकड़े बताते हैं कि असम और त्रिपुरा राज्यों में सबसे ज्यादा 71 प्रतिशत पुरुष लाभार्थी रहे जबकि 29 फीसदी महिलाएं रहीं।
पुरुषों की जीवनशैली बड़ी वजह आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना को क्रियान्वित करने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के सीईओ डॉ. इंदुभूषण के मुताबिक संभवतया इसकी वजह यह हो सकती है कि चूंकि पुरुष घर के मुखिया होते हैं और घर चलाने की जिम्मेदारी उन्ही की होती है। तनावपूर्ण और अव्यवस्थित जीवन शैली के चलते कई बिमारियों के शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा पुरुष ध्रूम्रपान और मद्यपान जैसी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आदतों के शिकार भी होते हैं, जिसके चलते वे किडनी, लिवर, हार्टअटैक जैसी गंभीर बिमारियों के शिकार हो जाते हैं।
उत्तराखंड, गोवा और गुजरात भी शामिल
आंकड़े बताते हैं कि 19 राज्यों की सूची में पुरुष लाभार्थी राज्यों में उत्तराखंड में 65 प्रतिशत, दादर नगर हवेली में 51 प्रतिशत, दमन और दीव में 60 प्रतिशत, गोवा में 63 प्रतिशत, गुजरात में 64 प्रतिशत, हरियाणा में 57 प्रतिशत, एमपी में 52 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 57 प्रतिशत, तमिलनाडु में 59 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 52 प्रतिशत रहा।
बिहार-मिजोरम में महिलाएं सबसे ज्यादा
वहीं इसके उलट बिहार अकेला ऐसा राज्य है, जहां 75 फीसदी महिलाओं ने इस योजना का फायदा उठाया। इसके बाद दूसरे नंबर पर मिजोरम 64 फीसदी, मणिपुर 63 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में यह औसत 60 फीसदी रहा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 55 फीसदी, नागालैंड में 54 फीसदी और झारखंड में 53 फीसदी रहा। वहीं बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मिजोरम और नागालैंड में प्रसूति और स्त्री रोगों के सबसे ज्यादा क्लेम लिए गए।
पुरुषवादी है समाज
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और कार्यकारी समिति के सदस्य डॉ. केके कपूर का कहना है कि भारत का समाज पुरुषवादी समाज है, जहां पुरुषों को तरजीह दी जाती है। आज भी ग्रामीण इलाकों में घर की स्त्रियों को कोई बीमारी होने पर उन्हें घरेलू इलाज करने के लिए कहा जाता है, या उनकी बीमारी को अनदेखा कर दिया जाता है। उनका कहना है कि सरकार को चाहिए कि जिस वर्ग के लिए सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की है, उस निचले तबके के लोगों को जागरुक करे और बताए कि बिमारियों को लेकर स्त्री-पुरुष का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा निजी अस्पताल
आंकड़ों के मुताबिक देश में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 14 हजार 129 अस्पताल शामिल हो चुके हैं। इनमें 6,340 सरकारी अस्पताल और 7789 निजी अस्पताल हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा निजी अस्पताल 1315 और सरकारी 570, पंजाब में 4 सरकारी और 122 निजी अस्पताल, महाराष्ट्र में 115 सरकारी और 893 निजी, कर्नाटक में 406 सरकारी और 647 निजी, झारखंड में 238 सरकारी और 494 निजी, हरियाणा में 163 सरकारी और 391 निजी, गुजरात में 975 सरकारी और 1090 निजी और छत्तीसगढ़ में 727 सरकारी और 744 निजी अस्पताल योजना में शामिल हैं।