पिछले तीन महीनों में आयुष्मान भारत के तहत भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार लोग एंजियोप्लास्टी, ज्वाइंट और वाल्व रिप्लेसमेंट के साथ ही कैंसर के इलाज पर पूर्व अधिकृत 897 करोड़ रुपये में से 77 प्रतिशत राशि खर्च हुई है।
अक्तूबर में जहां इस योजना के तहत भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या प्रतिदिन 2,000 से 5,000 के बीच थी वहीं अब यह संख्या बड़ 10,000 प्रतिदिन हो गई है। आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर के मुकाबले भर्ती होने वाले मरीजों में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 23 सितंबर को इस योजना का शुभारंभ किया गया था। तब से अबतक 6.73 लाख मरीजों ने योजना का लाभ उठाया है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों जहां स्वास्थ्य सेवा का बुरा हाल है, यहां भर्ती होने वालों की संख्या में काफी उछाल आया है। यूपी में पिछले एक महीने के दौरान इस योजना के तहत भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 70 फीसदी बढ़ गई है। झारखंड में 67 फीसद और बिहार में 50 फीसद इजाफा हुआ है।
यह आंकड़े इसलिए भी मायने रखते है क्योंकि निजी अस्पतालों में मिलने वाले महंगे इलाज के कारण स्वास्थ्य सेवाएं अब तक गरीब तबके से दूर थी। अधिकारियों ने बताया कि डेंटल सर्जरी और सामान्य इलाज लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं पिछले एक महीने के दौरान तृतीय श्रेणी की बिमारियों का इलाज करने वालों में भी काफी वृद्धि हुई है।
आयुष्मान भारत के उप मुख्य कार्यकारी दिनेश अरोड़ा ने कहा, 'आशा और डाक विभाग के जरिए पीएम ने 7.5 करोड़ से ज्यादा पत्र बांटे हैं। जागरुकता फैलाने के कारण ज्यादातर लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। यह आंकड़े लगभग 30 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच गए हैं। जैसे-जैसे लोग योजना को लेकर जागरुक होंगे वैसे-वैसे यह मजबूत होती जाएगी।' डाटा के अनुसार 65 प्रतिशत लाभार्थियों को निजी अस्पतालों में इलाज मिला है।