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राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ: सोनोवाल ने किया दीक्षांत समारोह का उद्घाटन, आयुर्वेद के प्रसार में योगदान सराहा

Tue, 15 Mar 2022 06:29 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने आयुर्वेद के महत्व को उल्लेखित करते हुए कहा कि इसमें आहार को सबसे पहला उपचार बताया गया है। हमारे पूर्वजों ने स्वस्थ रहने के कई तरीके हमें दिए हैं, ऐसी आदतों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की जरूरत है ताकि हमारा देश स्वस्थ रहे।
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केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल - फोटो : राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ
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विस्तार
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केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के 25वें दीक्षांत समारोह का बीते शुक्रवार को उद्घाटन किया था। यहां उन्होंने युवा आयुर्वेद चिकित्सकों से आह्वान किया कि वह पारंपरिक चिकित्सा और ज्ञान को दुनिया के नक्शे पर लाने, देश को नई ऊंचाई पर ले जाने और मानव जाति की मदद के लिए खुद को तैयार करें। 

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सोनोवाल ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने में विद्यापीठ के योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सम्मान की बात है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत में पारंपरिक चिकित्सा के लिए एक वैश्विक केंद्र की स्थापना करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही आयुष राज्य मंत्री मुंजपरा महेंद्रभाई ने भी इस दीक्षांत समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

इस दौरान सोनोवाल ने प्रोफेसर वैद्य सुभाष रानाडे और आचार्य वैद्य ताराचंद शर्मा को आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2021-22 से सम्मानित किया। 12 वैद्यों को विद्यापीठ कि फेलोशिप से सम्मानित किया गया। सोनोवाल ने उम्मीद जताई कि संस्थान आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में इसी तरह सकारात्मक योगदान देना जारी रखेगा।
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समारोह के दौरान आयुष मंत्रालय के सचिव ने कहा कि विद्यापीठ ने मंत्रालय की कई परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अभ्यास के क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी इच्छा से शिक्षण के क्षेत्र में आना चाहिए। हर साल बड़ी संख्या में आयुर्वेदिक संस्थानों से निकलते हैं, इनकी मदद से चिकित्सकों की बढ़ती कमी की समस्या का समाधान किया जा सकता है।

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