आने वाले समय में आयुर्वेदिक दवा बेचने के लिए एलोपैथिक दवा बेचने की तर्ज पर ही फार्मेसी या उसके समकक्ष डिप्लोमा लेना होगा। इससे स्पष्ट है कि अब परचून की दुकानों पर खुलेआम आयुर्वेदिक दवाएं नहीं बेची जा सकेंगी। आयुष मंत्री श्रीपद यसो नाईक ने बताया कि सरकार जल्द ही इस संबंध में कानून लाने जा रही है।
दरअसल हरिद्वार से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद में आयुर्वेदिक दवाओं के गुणवत्ता नियंत्रण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आयुुष मंत्री से पूछा कि जिस तरह एलोपैथिक दवाओं की बिक्री के लिए फार्मेसी में डिप्लोमा की जरूरत होती है। उसी तरह आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री के लिए भी इस तरह के लाइसेंस का प्रावधान लाया जा रहा है।
इस पर आयुष मंत्री ने खुलासा किया कि डिप्लोमा के बारे में नया कानून लाया जा रहा है, जिससे इसका निराकरण जरूर होगा। दरअसल निशंक ने गुणवत्ता के अभाव में न्यूयार्क में आयुर्वेदिक दवाओं को प्रतिबंधित किए जाने का मुद्दा उठाया था। आयुष मंत्री ने स्वीकार किया कि 69 दवाओं को गुणवत्ता के अभाव में प्रतिबंधित किया गया है। नाईक ने यह भी विश्वास दिलाया कि दवाओं की गुुणवत्ता के लिए उनका वैज्ञानिक शोध कराया जाएगा।
यही नहीं निशंक ने शून्य काल के दौरान भी परचून की दुकानों पर इन दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा उठाया। साथ ही उत्तराखंड में आयुर्वेद का अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान खोले जाने की भी मांग उठाई।