अयोध्या में राम जन्मूभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का निस्तारण करने के लिए अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बहुत सारी इतिहास, संस्कृति, पुरातात्विक और धार्मिक किताबों का सहारा लिया। ये किताबें संस्कृत, हिंदी, उर्दू, फारसी, तुर्की, फ्रांसीसी और अंग्रेजी आदि विभिन्न भाषाओं में लिखी गई थी, जिनके अनुवाद का अवलोकन किया गया। लेकिन इस फैसले की राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय सांविधानिक पीठ ने सावधानी बरतते हुए यह भी कहा कि फैसला को लेकर इतिहास की व्याख्या करने के ‘खतरे’ भी थे।