विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय के मुताबिक बूटा सिंह ने ही पटना में सिविल मामलों के विशेषज्ञ पूर्व वकील जनरल लाल नारायण सिन्हा से मिलने की सलाह दी। सिन्हा ने ही उन्हें रामलला विराजमान की ओर से याचिका दायर करने की सलाह दी। जस्टिस देवकीनंदन अग्रवाल ने इसके बाद 1989 में रामलला विराजमान और जन्म स्थान के बतौर विधिक अभिभावक इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर राम जन्म भूमि पर स्वामित्व उन्हें सौंपे जाने की मांग की।
आपराधिक मामले में भी पक्ष में फैसले का भरोसा
बाबरी मस्जिद-ध्वंस को भले ही सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया हो लेकिन विहिप को इस मामले में भी अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है। अभी तक 1100 में से 350 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और मार्च तक फैसला सुनाया जाना है। चंपत राय का कहना है अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत आधे गवाह तो विहिप के सदस्य हैं। इनमें से एक त्रिलोकी पांडे तो सुप्रीम कोर्ट में खुद वादी थे।
राव की भी कृतज्ञ विहिप
वि्व हिंदू परिषद ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को भी धन्यवाद दिया। चंपत राय का कहना था कि छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद अगले ढाई दिनों तक उन्होंने राम जन्मभूमि स्थल पर सुरक्षा बल न भेजकर अस्थायी मंदिर बनाने का अवसर दिया। जबकि कुछ समय पहले प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका था।