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मंदिर निर्माण के लिए नया ट्रस्ट बनाने की राह आसान नहीं, पुराने तीन के बीच खींचतान शुरू

Wed, 13 Nov 2019 02:47 AM IST
गौरव पाण्डेय धीरेंद्र सिंह, अयोध्या

सार

  • श्रीराम जन्मभूमि न्यास, रामालय व श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास बन रहे दावेदार
  • सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश, फिर भी ट्रस्टों में खींचतान शुरू
  • विवाद अदालत में होने के बावजूद भव्य राम मंदिर बनाने के लिए सक्रिय थे तीन ट्रस्ट 
  • सबसे पुराना साल 1985 में बना ट्रस्ट विश्व हिंदू परिषद का श्रीराम जन्मभूमि न्यास है
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नया ट्रस्ट बनाकर रामलला विराजमान का मंदिर बनाने का आदेश दिया है। इसे लेकर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंभीर हैं और उनकी इच्छा के अनुरूप ट्रस्ट के गठन की तैयारी भी चल रही है। इसके बावजूद यहां राममंदिर निर्माण के लिए तीन पुराने ट्रस्टों के बीच अपने-अपने दावे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। 

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विश्व हिंदू परिषद कह रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मंदिर बनाने का अधिकार है, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रामालय ट्रस्ट खुद का संवैधानिक अधिकार जता रहे हैं। जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास को सरकार के ट्रस्ट में शामिल करने की बात कह रहे हैं।

बता दें कि यह विवाद अदालत में होने के बावजूद विराजमान रामलला का भव्य मंदिर बनाने के लिए तीन ट्रस्ट सक्रिय थे। सबसे पुराना साल 1985 में बना ट्रस्ट विश्व हिंदू परिषद का श्रीराम जन्मभूमि न्यास है, दूसरा विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव की पहल पर बना रामालय है। तीसरा ट्रस्ट जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण की अगुवाई में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास भी इन्हीं दोनों ट्रस्टों से इतर दावेदारी करता है। 
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सबकी अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग

विहिप की अगुवाई वाले श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास हैं। इस ट्रस्ट में राम मंदिर निर्माण के लिए यहां 1990 में खोली गईं पत्थर तराशी और मूर्ति निर्माण की तीन कार्यशालाएं चलती हैं। ट्रस्ट की अरबों की जमीन है, राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के खाते में शिलादान अभियान से मिली करीब आठ करोड़ की नकदी है।

मंदिर निर्माण के फैसले के बाद अयोध्या से लेकर दिल्ली तक विहिप नेता इसी ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर बनाने का दावा कर रहे हैं। उधर, छह दिसंबर 1992 को ढांचा ढहाए जाने के बाद 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव के प्रयास से द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती समेत 25 धर्माचार्यों ने अयोध्या में जन्मभूमि पर राममंदिर बनाने के लिए रामालय ट्रस्ट का गठन किया था। तब इसके संयोजक ज.गु.रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य थे। 

श्रृंगेरीपीठ के धर्माचार्य स्वामी भारती भी ट्रस्ट में शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंदिर बनाने का कानूनी अधिकार होने का दावा कर रहे हैं। साथ ही विश्व हिंदू परिषद के ट्रस्ट को अधिग्रहण के पहले का बना होने की वजह से अवैध ठहराते हैं। वे यह भी कहते हैं कि महंत जन्मेजय शरण हमारी कार्यकारिणी में हैं।

'न्यास के अध्यक्ष हम हैं, सब हमारे अधीन'

अब ज्यादा समय नहीं रह गया है। पहले से ही कार्यशाला में शिलाखंड तैयार हैं उन्हीं को लेकर वहां लगाया जाएगा। यह निश्चित है मोदी जी और योगी जी के कार्यकाल में दिव्यादिदिव्य, भव्यादिभव्य राम मंदिर का निर्माण बहुत जल्द शुरू हो जाएगा। न्यास के अध्यक्ष हम हैं सब हमारे अधीन रहेंगे, मोदी जी-योगी जी के अधीन रहेगा।
-महंत नृत्यगोपाल दास, अध्यक्ष श्रीराम जन्मभूमि न्यास


'राममंदिर के लिए हम लड़े, दूसरा कौन ट्रस्ट है?'

मंदिर का निर्माण हमारा ट्रस्ट करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई नया ट्रस्ट नहीं बनाने जा रहे हैं। दूसरे जो ट्रस्ट दावा कर रहे हैं उनकी कोई अहमियत नहीं है। संघ और संतों ने मिलकर राम मंदिर की लड़ाई लड़ी। इसी लहर में भाजपा सत्ता में आई। हमारे ट्रस्ट का अधिकार कोई नहीं छीन सकता। मंदिर निर्माण की हमारी तैयारी पूरी है।
-महंत कमलनयन दास, उत्तराधिकारी महंत मणिरामदास की छावनी एवं सदस्य श्रीराम जन्मभूमि न्यास

आज दिल्ली में दावा करेगा रामालय ट्रस्ट

रामालय ट्रस्ट सचिव अविमुक्तेश्वरानंद ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि वाराणसी से दिल्ली जा रहे हैं। बुधवार को केंद्र सरकार के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करेंगे। इसकी प्रतिलिपि प्रधानमंत्री को भी देंगे। उनका तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एक्वीजीशन ऑफ सरटेन एरिया अयोध्या एक्ट 1993 की धारा 6 केंद्र सरकार को अधिग्रहीत भूमि किसी ट्रस्ट को देने के लिए प्राधिकृत करती है। जो सरकार द्वारा आरोपित शर्तों को मानने को इच्छुक हो। 

फैसले में यह भी कहा गया है कि अधिनियम की धारा 6 व 7 के द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए सरकार कोई ट्रस्ट स्थापित करे। अथवा कोई अन्य समुचित कार्यनिधि स्थापित करे जिसको वाद में न्यायादेशित भूमि दी जा सकी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के आधार पर 1995 में पंजीकृत रामालय ट्रस्ट को राममंदिर निर्माण के लिए पर्याप्त आधार हासिल है। कोर्ट में भी हमारे वकील ने पैरवी की।

सरकार से नहीं लेंगे फूटी कौड़ी, भक्त करेंगे व्यवस्था

रामालय ट्रस्ट के सचिव अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि विश्व हिंदू परिषद का श्रीराम जन्मभूमि न्यास अधिग्रहण के पहले बना हुआ है। उसकी तैयारी भी केवल 2.77 एकड़ के मंदिर निर्माण की है। जबकि अब हमारी तैयारी संपूर्ण अधिग्रहीत की गई 70 एकड़ पर होगी। हमने कोर्ट के फैसले से पहले किसी भी तरह का चंदा या दान नहीं लेने का निर्णय लिया था। ट्रस्ट में चारों शंकराचार्य समेत प्रमुख धर्माचार्य और पीठ शामिल है। 

हम मंदिर निर्माण के लिए सरकार से फूटी कौड़ी भी नहीं लेंगे, हजारों करोड़ रुपये की भूमि मिलते ही भक्त व्यवस्था करेंगे। सरकार को खुद मंदिर-मस्जिद बनाने का अधिकार नहीं है, और न ही श्रीरामजन्मभूमि न्यास मंदिर निर्माण के लिए वैधानिक है। तीसरा ट्रस्ट श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष महंत जन्मेजय शरण हमारा विरोध नहीं करेंगे वे हमारे ट्रस्ट की कार्यकारिणी में हैं।

'मोदी सरकार बनाए भव्य और दिव्य राममंदिर'

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष महंत जन्मेजयशरण कहते हैं, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राम मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है, किसी पुराने ट्रस्ट को नहीं। सौहार्दपूर्ण परिवेश में मंदिर का निर्माण नव्य और भव्य होना चाहिए। विहिप अकेले मांग करेगा तो विरोध होगा। 

सभी ट्रस्ट राम जी के लिए बने हैं। रामालय को भी विरोध नहीं करना चाहिए। जिन लोगों ने आंदोलन में आहुति दी है उनका प्रतीक चिह्न जरूर होना चाहिए ताकि मंदिर में जो जाए उनके बारे में जान सके। सबको केवल मंदिर पर ध्यान देना चाहिए न कि अपने-अपने ट्रस्ट और हित पर। सरकार को चाहिए कि सभी न्यासों से एक-एक को लेकर सामंजस्यता से एक ट्रस्ट बनाए। इसकी मॉनीटरिंग केंद्र सरकार करे।

सरकारी ट्रस्ट से ही होगा विकास : आचार्य सत्येंद्र दास

रामलला विराजमान के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है। इसी आदेश के तहत नया ट्रस्ट बने, तभी विकास होगा। इसके अलावा जिन लोगों ने राम मंदिर बनाने के नाम पर ट्रस्ट बना रखे हैं और चंदे व संपत्तियां बनाई हैं, उन्हें सरकार को दे देना चाहिए। सरकार को भी अधिकार है कि यह लोग न दें तो उसे सीज कर ले। वैष्णोदेवी की तरह ट्रस्ट बनेगा तभी अयोध्या का भाग्य खुलेगा।

पक्षकारों ने भी सरकारी ट्रस्ट की दी दलील

अयोध्या विवाद के पक्षकार भी चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन केंद्र सरकार करे। किसी संस्था को अधिग्रहीत जमीन देने और मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी देने से विवाद बढ़ेगा। आपसी सामंजस्य बिगड़ेगा।
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विहिप का कुछ नहीं, सब रामजी को दे दें : निर्मोही अखाड़ा

निर्मोही अखाड़ा के पक्षकार महंत दिनेंद्र दास कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण का दायित्व सरकार पर है। विश्व हिंदू परिषद को मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन से लेकर ईंट, शिलाएं और संपत्तियां सरकार को दे देनी चाहिए। रामजी के लिए सब कुछ लिया गया है उम्मीद है कि उसे देने से मना नहीं कर पाएंगे। केंद्र सरकार का ट्रस्ट होगा तभी अयोध्या का विकास होगा।

मस्जिद के लिए चिह्नित हो जमीन, सरकारी ट्रस्ट ही बनाए मंदिर : इकबाल

बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी कहते हैं कि हमें मिली मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन भी सरकार को चिह्नित करनी चाहिए, ताकि उसके निर्माण की योजना बन सके। हम अधिग्रहीत परिसर में दावा करके आपसी सामंजस्य व विवाद नहीं बढ़ाना चाहते हैं। रही बात राम मंदिर की तो इसे सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के माध्यम से करने का अधिकार है। लेकिन जिस तरह से विहिप के लोग खुद मंदिर बनाने का दावा कर रहे हैं उससे सौहार्दपूर्ण माहौल पर असर पड़ेगा। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सारी चीजों को गहराई से समझेंगे।
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