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Ram Mandir: राम मंदिर को सांस्कृतिक आजादी का प्रतीक बताएगी विहिप, उद्घाटन के पहले चलेगा ये अभियान

Amit Sharma
Updated Tue, 15 Aug 2023 12:16 PM IST

सार

जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, 'इसका परिणाम हम देखते हैं कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भी गुलामी के अनेक प्रतीक हमारे बीच बने रहे। यहां तक कि देश की न्याय व्यवस्था भी अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए कानूनों से संचालित होती रही।' 
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राम मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया


'गुलामी के अनेक प्रतीक हमारे बीच'

जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, 'इसका परिणाम हम देखते हैं कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भी गुलामी के अनेक प्रतीक हमारे बीच बने रहे। यहां तक कि देश की न्याय व्यवस्था भी अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए कानूनों से संचालित होती रही। यानी हमारे देश के लोगों को न्याय भी अंग्रेजों के कानूनों से दी जाती रही। अब केंद्र सरकार ने नए आपराधिक कानून बनाकर इस गुलामी की निशानी को समाप्त करने का प्रयास किया है। अभी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना बाकी है।' 


उन्होंने कहा कि 'दुनिया का कोई भी राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक चेतना को विकसित किए बिना विकास नहीं कर पाया है। यह बात अमेरिका, चीन, जापान सहित दुनिया के किसी भी राष्ट्र पर लागू होती है। यदि भारत को भी अपना सर्वोच्च विकास करना है तो इसे अपनी सांस्कृतिक स्वतंत्रता को प्राप्त करना चाहिए। राम मंदिर के उद्घाटन के साथ ही भारत अपनी इस सांस्कृतिक स्वतंत्रता को प्राप्त करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाएगा।'


'राम किसी वर्ग विशेष के नहीं'

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि 'भगवान राम को किसी संप्रदाय विशेष के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वे इस देश की आत्मा हैं। इस देश में रहने वाले किसी भी धार्मिक और क्षेत्रीय वर्गों की अपनी पहचान तब तक पूर्ण नहीं होती जब तक कि वह अपने आपको भगवान राम के साथ नहीं जोड़ती। यही कारण है कि भगवान राम पर इस देश के हर वर्ग हर संप्रदाय का समान अधिकार है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक तौर पर संपन्न जनसमुदाय अपने लिए अधिक विकास करता है और इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए।' 
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