गुबंद के नीच कभी पूजा नहीं हुई
इससे पहले मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा, मस्जिद के बीच वाले गुबंद के नीचे कभी पूजा नहीं हुई। 1949 में गलत तरीक से वहां मूर्ति रखी गई। सन् 1528 में बाबर के कमांडर मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी। तब से वहां नमाज पढ़ी जा रही थी। जबकि राम चबूतरे पर हिन्दू पूजा करते थे।
कोर्ट रूम लाइव
जस्टिस बोबडे (मुस्लिम पक्ष से): यानी आप इस बात पर विवाद नहीं कर रहे हैं कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ था।
जिलानी (मुस्लिम पक्ष के वकील): अयोध्या का राम का जन्म हुआ, इसे लेकर कोई विवाद नहीं है। हमारा विवाद इस मस्जिद केभीतर अहाते में जन्मस्थान को लेकर है।
जिलानी: 1949 से पहले मध्य गुंबद के नीचे पूजा का कोई सुबूत नहीं है।
जस्टिस बोबडे: आपके पास यह सबूत है कि 1949 से पहले वहां नियमित रूप से नमाज होती थी।
जिलानी: इसके लिखित सबूत तो नहीं है लेकिन जुबानी सबूत हैं।
जस्टिस अशोक भूषण: रामचरित्र मानस और रामायण में अयोध्या में दशरथ महल में राम के जन्म का जिक्र है, स्थान का नहीं।
जस्टिस चंद्रचूड़: ग्रंथों में जन्मथान का जिक्र नहीं है तो क्या भगवान राम का जन्म अयोध्या में नहीं हुआ?
जस्टिस बोबडे: आइन-ए-अकबरी में मस्जिद का जिक्र क्यों नहीं है?
जिलानी: किताब में रामजन्मभूमि का भी जिक्र नहीं है। जिक्र अवध का है।