सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ बृहस्पतिवार को अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि के विवाद की सुनवाई करेगी। संविधान पीठ बृहस्पतिवार को आगे होने वाली सुनवाई की रूपरेखा तैयार करेगी। अब तक इस मामले से जुड़ी 14 अपीलों की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी, लेकिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ गठित कर दी है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को शामिल किया गया है। बृहस्पतिवार को होने वाली सुनवाई में यह तय होने की संभावना है कि इस मामले की सुनवाई कब से होगी और रोजाना होगी या नहीं। साथ ही यह देखने वाली बात होगी कि संविधान पीठ इस मामले में किन-किन संवैधानिक पहलुओं का परीक्षण करेगी। गौरतलब है कि पिछले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 27 सितंबर को दिए फैसले में इस मामले को महज एक भूमि विवाद माना था। तीन सदस्यीय पीठ ने इसमें कोई संवैधानिक सवाल नहीं होने की बात कहते हुए यह मामला पांच सदस्यीय संविधान पीठ को भेजने से इनकार कर दिया था।
अयोध्या मसले की सुनवाई में मुस्लिम जज की मांग खारिज
अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए गठित पांच सदस्यीय संविधान पीठ में मुसलमान जज को शामिल करने की मुस्लिम पक्षकार की मांग बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (बीएमएसी) ने खारिज कर दी है। बीएमएसी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने इस मांग को गलत बताते हुए कहा कि जज धर्म से परे रह कर संविधान के लिए काम करते हैं। हाजी महबूब ने पीठ में मुसलमान जज नहीं होने पर सवाल उठाया था।
जिलानी ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि पीठ में किसी धर्म को मानने वाले कितने लोग हैं। जज चाहे हिंदू हों या मुसलमान, उनके लिए निजी विचारधारा और धर्म मायने नहीं रखते। उन्होंने कहा कि हमें इस पीठ से कोई परेशानी नहीं है। यह जनता में चर्चा का विषय तो हो सकता है, मगर हमारे लिए नहीं।