अयोध्या भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की 2003 की रिपोर्ट के लेखकीय दावे पर सवाल करने को लेकर गुरुवार को यू-टर्न ले लिया और मामले में सुप्रीम कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए उससे माफी मांगी।
मुस्लिम पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ को बताया कि वे एएसआई रिपोर्ट के सारांश के लेखकीय दावे पर सवाल नहीं उठाना चाहते।
धवन ने कहा कि रिपोर्ट के लेखकीय दावे और सारांश पर सवाल उठाने की जरुरत नहीं है। यदि हमने न्यायालय का समय बर्बाद किया है तो हम इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि जिस रिपोर्ट की बात की जा रही है, उसका एक लेखक है और हम लेखन पर सवाल नहीं उठा रहे हैं।
बुधवार को रिपोर्ट पर उठाया था सवाल
मुस्लिम पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने बुधवार को एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि हर अध्याय एक लेखक ने लिखा है लेकिन सारांश में किसी का जिक्र नहीं है।
पीठ ने कहा कि धवन ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा है कि उन्होंने रिपोर्ट पर सवाल करने का अपना अधिकार छोड़ा नहीं है लेकिन न्यायालय द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद सबूतों पर संदेह नहीं किया जा सकता।