फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अयोध्या मामला : खूब चला कोर्टरूम ड्रामा, मुस्लिम पक्ष के वकील ने फाड़ा नक्शा 

Wed, 16 Oct 2019 09:53 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
'अयोध्या रिविजिट' किताब में दर्ज नक्शा - फोटो : social media
विज्ञापन

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन चली सुनवाई के आखिरी दिन बुधवार को कोर्टरूम ड्रामा देखने को मिला। मुस्लिम और हिंदू पक्षों ने अपनी—अपनी दलीलें पेश कीं। मगर हंगामा तब खड़ा हो गया, जब मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हिंदू महासभा के वकील द्वारा पेश किए गए नक्शे को फाड़ दिया। 

विज्ञापन

 


यह नक्शा अयोध्या से जुड़ा हुआ था। नक्शा फाड़े जाने के बाद हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह के साथ उनकी तीखी बहस भी हो गई। पूरे मामले पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नाराजगी भी जताई। राजीव धवन ने किताब और नक्शा पेश किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं था। उन्होंने कहा, 'क्या मैं इस दस्तावेज को फाड़ सकता हूं। यह सुप्रीम कोर्ट है मजाक नहीं है।' यह कहते हुए उन्होंने नक्शे को फाड़ दिया। 

धवन ने कहा- ये वायरल हो गया है कि मैंने कोर्ट में नक्शा फाड़ा, लेकिन मैंने ये कोर्ट के आदेश पर किया। मैंने कहा था कि मैं इसे फेंकना चाहता हूं तब चीफ जस्टिस ने कहा कि तुम इसे फाड़ सकते हो। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने कहा था कि अगर आप फाड़ना चाहें तो फाड़ दें।

विकास सिंह ने पेश की थी किताब 

इससे पहले हिंदू पक्ष के वकील विकास सिंह ने सुनवाई के दौरान एक किताब 'अयोध्या रिविजिट' पेश करने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि इस किताब के अध्याय 24 में लिखा है, 'जन्मस्थान के वायु कोण में रसोई थी। जन्मस्थान के दक्षिणी भाग में कुआं था। जन्मस्थान ठीक बीच में था।' फिर विकास ने उसी किताब का नक्शा कोर्ट को दिखाया। वह नक्शा धवन के पास पहुंचा, जिसे धवन ने फाड़ डाला। 

सीजेआई ने जताई नाराजगी 

सीजेआई रंजन गोगोई ने पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हम इस तरह से सुनवाई नहीं कर सकते।

किताब के लेखक ने जताई आपत्ति 

इस किताब में राम मंदिर के पहले के अस्तित्व के बारे में लिखा है। यह किताब रिटायर्ड आईपीएस कुणाल किशोर ने लिखी है। कुणाल किशोर ने नक्शा फाड़े जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धवन जानते हैं कि अगर नक्शा कोर्ट के सामने पेश हो जाता तो उनका केस न के बराबर रह जाता। अगर उन्हें समस्या थी, तो अपने तय समय में बात रखनी चाहिए थी।  

विज्ञापन
विज्ञापन




 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें