राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिलाएं और पहले से मौजूद सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों वाले लोग उच्च जोखिम में हैं। उन्होंने कहा, आधारभूत चिकित्सा स्थितियों जैसे क्रोनिक पल्मोनरी या हृदय संबंधी समस्याओं वाले रोगियों को वायु प्रदूषण के संपर्क से बचने के लिए अधिक सावधान रहना चाहिए।
इसमें कहा गया है कि भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान की 'सफर' वायु निगरानी प्रणाली के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक मध्यम रहा। एडवायजरी में कहा गया है कि खराब पोषण स्तर और आवास की खराब स्थिति वाले, खाना पकाने, हीटिंग और लाइटिंग के लिए फॉसिल फ्यूल का इस्तेमाल करने वाले लोग उच्च जोखिम में हैं और यातायात पुलिसकर्मी, यातायात स्वयंसेवक, निर्माण श्रमिक, सड़क सफाई कर्मचारी, रिक्शा चालक, ऑटो रिक्शा चालक, सड़क किनारे के विक्रेता आदि भी उच्च जोखिम में हैं।
पांच नवंबर की तारीख वाली एडवायजरी में कहा गया, खराब से गंभीर एक्यूआई वाले दिनों में सुबह और देर शाम की सैर, दौड़ने, जॉगिंग और शारीरिक व्यायाम से बचें। सुबह और देर शाम के घंटों के दौरान बाहरी दरवाजे और खिड़कियां न खोलें। यदि आवश्यक हो तो दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर को हवादार कर सकते हैं। निगरानी के बारे में इसने अधिकारियों से वायु प्रदूषण और उनकी मृत्यु दर से संबंधित ज्ञात बीमारियों के आंकड़ों का दस्तावेजीकरण और रखरखाव करने के लिए कहा है।
इसने एक्यूआई स्तरों और कमजोर आबादी के घनत्व के आधार पर हॉट स्पॉट की पहचान करने और आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक उनके लिए पर्याप्त पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है। इसमें कहा गया है कि जिलों और शहरों के लिए 'स्वास्थ्य कार्य योजना' में महीनेवार औसत वायु प्रदूषण के स्तर, कमजोर आबादी का दस्तावेजीकरण शामिल होगा।