देश में हो रहे विमान हादसों ने एविएशन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश के बाद अब बारामती हादसा भी सामने आया, जिसने लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी सेफ्टी को लेकर संसद में भी बड़ा खुलासा हुआ है।
सरकार ने संसद में बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय में करीब 50 प्रतिशत पद खाली हैं। वहीं, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में लगभग 38 प्रतिशत और एयर ट्रैफिक कंट्रोल में करीब 23 प्रतिशत पद खाली हैं। इन खाली पदों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया धीमी होने के कारण विमानन सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इन पदों को भरने के लिए कदम उठाए जाएंगे और सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जाएगा।
सरकार ने संसद को बताया, डीजीसीए में कुल 1,630 पद स्वीकृत है। लेकिन इनमें से 805 पद खाली हैं। यानी लगभग आधे पदों पर ही कर्मचारी तैनात हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में कुल 25,730 पदों में से सिर्फ 16,011 पर ही नियुक्ति हुई है, जबकि 9,719 पद अभी भी खाली हैं। एयर ट्रैफिक कंट्रोल में भी स्थिति बेहतर नहीं है। 5,537 पदों में से 1,274 पद अभी खाली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में खाली पद होने से विमानन सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
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डीजीसीए की एक समिति ने नागरिक उड्डयन में स्टाफ की कमी को गंभीर मुद्दा बताया है। समिति ने कहा कि कर्मचारियों की कमी और बढ़ती जिम्मेदारियों के चलते डीजीसीए अक्सर प्रतिक्रियात्मक मोड में काम करता है। समिति ने डीजीसीए में स्टाफ मजबूत करने और प्रशिक्षण प्रणाली सुधारने की सिफारिश की है।