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Aviation: विमान खरीदने-लीज के नियम आसान करने की तैयारी में सरकार, यात्रियों को मिल सकता है ये बड़ा फायदा

Mon, 31 Aug 2026 06:17 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय एयरलाइंस को अभी 1,640 विमानों की डिलीवरी मिलनी बाकी है। 2035 तक देश में कमर्शियल विमानों की संख्या 2,250 से ज्यादा होने का अनुमान है। इससे विमान फाइनेंसिंग और लीजिंग के कारोबार में बड़े अवसर पैदा होंगे।
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कार्गो विमान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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भारत आने वाले दस वर्षों में दो हजार से ज्यादा नए विमान अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने विमान खरीदने और लीज पर लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

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सूत्रों का कहना है, सरकार टैक्स, विमान के आयात-निर्यात और दिवालिया होने की स्थिति में लीजिंग कंपनियों के हितों की सुरक्षा जैसे नियमों की समीक्षा कर रही है। इसका मकसद विमान कंपनियों पर फाइनेंस का बोझ कम करना है। इससे एयरलाइंस की लागत घट सकती है। यात्रियों को सस्ता हवाई किराया मिलने की उम्मीद है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। समिति विमान लीज और फाइनेंसिंग की व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपायों पर काम कर रही है। इसमें जीआईएफटी आईएफसीएसी के जरिए फाइनेंसिंग के नए विकल्प भी देखे जा रहे हैं। समिति विदेशी कंपनियों और भारतीय एयरलाइंस के बीच विमान खरीदने और लीज पर लेने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर रही है।
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समिति टैक्स, शुल्क और विमान के आयात-निर्यात से जुड़े नियमों को भी देख रही है। इसका मकसद भारत को विमान लीज और फाइनेंसिंग के लिए बेहतर जगह बनाना है। समिति यह भी देख रही है कि भारत में ऐसा वित्तीय ढांचा बनाया जा सकता है या नहीं, जिसमें एयरलाइन के दिवालिया होने पर भी कर्ज देने वाली कंपनियों का पैसा सुरक्षित रहे। इससे कर्ज देने वालों के पैसों की सुरक्षा होगी और जरूरत पड़ने पर वे अपनी गारंटी या संपत्ति पर आसानी से दावा कर सकेंगे।

दरअसल, सरकार जीआईएफटी आईएफएससी को विमान लीजिंग और विमान फाइनेंसिंग का बड़ा अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाना चाहती है। इसी के तहत यह पूरी कवायद की जा रही है। सरकार के अनुसार, भारतीय एयरलाइंस को अभी 1,640 विमानों की डिलीवरी मिलनी बाकी है। 2035 तक देश में कमर्शियल विमानों की संख्या 2,250 से ज्यादा होने का अनुमान है। इससे विमान फाइनेंसिंग और लीजिंग के कारोबार में बड़े अवसर पैदा होंगे।
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