कर्मचारी की ओर से दी गई जानकारी सिर्फ अधिकृत अधिकारियों के साथ जरूरत के मुताबिक साझा की जाएगी। विमानन क्षेत्र से जुड़े लोगों के मुताबिक, दूसरी एयरलाइंस भी ऐसी व्यवस्था अपना सकती हैं।
एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली की घटना के बाद सभी एयरलाइंस सतर्क हो गई हैं। कंपनियां जल्द अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक जानकारी देने की व्यवस्था शुरू कर सकती हैं। इसके तहत कर्मचारी ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल की जानकारी खुद दे सकेंगे, जो दिमाग और तंत्रिका तंत्र (साइकोएक्टिव पदार्थों) पर असर डालते हैं।
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इस दिशा में सबसे पहले टाटा समूह की एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पहल की है। कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ऐसी व्यवस्था शुरू की है। इसमें वे ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल या उन पर निर्भरता की जानकारी खुद दे सकते हैं, जो सीधे दिमाग और तंत्रिका तंत्र पर असर डालते हैं। कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है, यह कदम किसी खास घटना के बाद नहीं उठाया गया है। इसका मकसद कर्मचारियों की सुरक्षा, समय पर मदद और एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
कंपनी से सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाएगा। इसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मौजूदा नियम सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स के तहत शुरू किया गया है। नियमों में क्रू सदस्यों को ऐसे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की जानकारी खुद देने के लिए कहा गया है, जो उनकी ड्यूटी करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
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इसी के तहत एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने कर्मचारियों के बीच 'सेफ्टी सर्कुलर 04 ऑफ 2026' सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर यूज ऑफ साइकोएक्टिव सब्सटेंसेज नाम से एक सुरक्षा सर्कुलर जारी किया है। इसमें कर्मचारी एयरलाइन के सेफ्टी रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म या तय ई-मेल के जरिए जानकारी दे सकेंगे। सर्कुलर के मुताबिक, कर्मचारी की ओर से दी गई जानकारी सिर्फ अधिकृत अधिकारियों के साथ जरूरत के मुताबिक साझा की जाएगी। विमानन क्षेत्र से जुड़े लोगों के मुताबिक, दूसरी एयरलाइंस भी ऐसी व्यवस्था अपना सकती हैं।