भारत के विमानन उद्योग का घाटा वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 36,000 से 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। पिछले वित्त वर्ष में यह 28,000 से 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान था। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह आकलन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में तेजी, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उड़ानें प्रभावित होने से एयरलाइंस पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
इस बीच यात्रियों की संख्या भी घट रही है। सितंबर में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या सालाना आधार पर 6.5 फीसदी कम रही। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात में 19.3 फीसदी की गिरावट आई। पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर पाबंदियां और उड़ानों के मार्ग में बदलाव इसकी प्रमुख वजह रहे।
एटीएफ की कीमतों में 46 फीसदी की बढ़ोतरी
अक्टूबर 2026 में घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 46.2 फीसदी बढ़ गईं। सितंबर की तुलना में भी इसमें 13.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। प्रति किलोलीटर कीमत करीब 16,000 रुपये बढ़ गई। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी 30 से 40 फीसदी है। इसके अलावा 35 से 50 फीसदी खर्च डॉलर में होता है। इसमें विमान का लीज किराया और रखरखाव भी शामिल है। ऐसे में रुपये की कमजोरी से कंपनियों का खर्च और बढ़ रहा है।
एटीएफ महंगा होने के बाद प्रमुख एयरलाइंस ने टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाया है या उसमें बदलाव किया है। इंडिगो ने 6 अक्तूबर और एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस व अकासा एयर ने 9 अक्तूबर से नई दरें लागू कीं। घरेलू उड़ानों में दूरी के आधार पर प्रति टिकट 375 से 1,200 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यह शुल्क अधिक है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या घटी
वहीं, सितंबर में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 118.2 लाख रही, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 126.4 लाख थी। अगस्त के मुकाबले भी यात्रियों की संख्या 2.5 फीसदी घटी। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान घरेलू यात्री यातायात 1.9 फीसदी गिरकर 786.1 लाख रह गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में घरेलू यात्री यातायात में 3 से 6 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात में 3 से 6 फीसदी की गिरावट का अनुमान है। एजेंसी ने कहा कि एयरलाइंस ने बढ़े खर्च का बोझ किराये के जरिये यात्रियों पर डाला तो मांग और प्रभावित हो सकती है। महंगाई के कारण लोगों के गैर-जरूरी खर्च में पहले ही कमी आई है।
20 फीसदी तक विमान खड़े
विमानों की उपलब्धता भी एयरलाइंस के लिए चुनौती बनी हुई है। अमेरिकी कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी के इंजनों में खराबी और आपूर्ति संबंधी दिक्कतों के कारण कई विमान उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। सेवाएं जारी रखने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त विमान लीज पर लेने पड़ रहे हैं। इससे खर्च बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंजन की समस्याओं, आपूर्ति में बाधा और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण अगस्त 2026 तक विमानन उद्योग के कुल बेड़े के 19 से 20 फीसदी विमान खड़े थे।