रेलवे यात्रियों के लिए राहत की खबर है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि ट्रेन में टिकट बुकिंग के समय सीट मिलने के दौरान वरिष्ठ नागरिकों और 45 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को लोअर बर्थ अपने-आप दी जाएगी, भले ही उन्होंने टिकट बुक करते समय इस विकल्प को न चुना हो। हालांकि यह सुविधा सीट उपलब्ध होने पर लागू होगी। राज्यसभा में लिखित जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे पहले से ही वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग व्यवस्था कर रहा है ताकि उनका सफर अधिक सुरक्षित और आरामदायक हो सके।
यह भी पढ़ें -
Parliament: लोकसभा में 8 दिसंबर को वंदे मातरम् पर PM शुरू करेंगे बहस, 9 को राज्यसभा में अमित शाह करेंगे चर्चा
कितनी सीटें आरक्षित रहती हैं?
रेल मंत्रालय के अनुसार, अलग-अलग कोचों में कई लोअर बर्थ रिजर्व रहती हैं। इसमें स्लीपर में छह-सात लोअर बर्थ आरक्षित रहती हैं। वहीं एसी थर्ड क्लास में चार से पांच और सेकेंड क्लास तीन से चार लोअर बर्थ आरक्षित रहती हैं। ये सीटें इन यात्रियों को प्राथमिकता दी जाएंगी। इसमें वरिष्ठ नागरिक, 45+ आयु की महिलाएं, गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।
दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था
रेल मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए अलग से कोटा रखा गया है। इसके तहत स्लीपर और थर्ड एसी /थ्रीई में चार सीटें (जिसमें दो लोअर बर्थ शामिल हैं) टू-एस और चेयर कार में चार सीटें आरक्षित रहती हैं। इन यात्रियों के साथ आने वाले अटेंडेंट को भी सीट मिलती है।
खाली सीट पहले इन्हीं को दी जाएगी
अगर ट्रेन में यात्रा के दौरान कोई सीट खाली मिलती है तो उसे पहले वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन और गर्भवती महिलाओं को दिया जाएगा, खासकर तब जब उनके पास ऊपरी या मध्य सीट हो।
यह भी पढ़ें -
IndiGo Crisis: उड्डयन मंत्री नायडू बोले- इंडिगो का परिचालन तीन दिन में सामान्य हो जाएगा, जांच के आदेश दिए गए
ट्रेनों में नई सुविधाएं
रेल मंत्री ने बताया कि नए कोचों में यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इसमें व्हीलचेयर के लिए जगह, चौड़ा दरवाजा और लोअर बर्थ, बड़े और सुविधाजनक शौचालय, बेसिन और उचित ऊंचाई पर शीशा, अंदर सहारा देने वाली रेलिंग और दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए ब्रेल साइनज भी लगाया गया है।
वंदे भारत और अमृत भारत में खास व्यवस्थाएं
इन दो ट्रेनों के पहले और आखिरी कोच में व्हीलचेयर की व्यवस्था, दिव्यांगजन अनुकूल शौचालय औक चढ़ने-उतरने के लिए मॉड्यूलर रैंप शामिल हैं।
समय से चल रहीं 80 फीसदी ट्रेनें; उन्नत तकनीकों से संचालन में सुधार: रेल मंत्री
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में कहा कि रेल की समय पालन क्षमता 80 फीसदी हो गई है। 70 रेल डिवीजनों में से 25 डिवीजन ऐसे हैं, जहां समय पालन 90 फीसदी तक है। वैष्णव ने कहा कि उन्नत तकनीकों, प्रणालीगत अपग्रेडशन के कारण ट्रेनों के संचालन में लगातार सुधार हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारतीय रेल कई अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्कों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जर्मनी की डॉयचे बान की लंबी दूरी की समय पालन दर साल 2024 में 67.4 फीसदी रही थी। जबकि भारतीय रेल इससे कहीं आगे निकल गई है।
रेल दुर्घटनाओं में 90 फीसदी की कमी
एक प्रश्न के जवाब में वैष्णव ने कहा कि रेल दुर्घटनाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है। इससे रेल दुर्घटनाओं में 90 फीसदी की कमी आई है। स्वदेशी स्वचालित रेल सुरक्षा कवच दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है।