दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को अगस्ता वेस्टलैंड मनी लांड्रिंग मामले में कथित बिचौलिए राजीव सक्सेना को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दे दी। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने सक्सेना को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इससे पहले अदालत से कहा था कि उसे सक्सेना के सरकारी गवाह बनने पर कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि यह एजेंसी के लिए बहुत फायदेमंद होगा।
दुबई के कारोबारी राजीव सक्सेना के सरकारी गवाह बनने को लेकर लगाई गई अर्जी पर पटियाला हाउस कोर्ट में दो मार्च को बयान दर्ज किए जाएंगे। सक्सेना ने अदालत में कहा कि उसने काफी सोच विचार करने के बाद गवाह बनने का फैसला किया है। इसके लिए किसी ने उस पर दबाव नहीं डाला है। उसने कहा कि मैं निष्पक्ष तरीके से अपनी गवाही देना चाहता हूं।
सक्सेना ने सरकारी गवाह बनने के लिए 27 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दी थी। उसे बीमारी के चलते 25 फरवरी को अदालत से नियमित जमानत भी मिल चुकी है। राजीव सक्सेना को 31 जनवरी को दुबई से प्रत्यर्पित कर लाया गया था और 12 फरवरी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
बता दें कि ईडी ने दुबई की दो कंपनियों यूएचवाई सक्सेना और मैट्रिक्स होल्डिंग्स के निदेशक राजीव सक्सेना को अगस्ता वेस्टलैंड मामले में आरोपी बनाया है। मामले में ईडी सक्सेना के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ईडी की चार्जशीट में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल, अगस्ता वेस्टलैंड, फिनमेकेनिका के पूर्व निदेशक ग्विसेप्पे ओर्सी और ब्रूनी स्पैग्नोलिनी, वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी के साथ राजीव सक्सेना की पत्नी शिवानी का भी नाम शामिल है।
ईडी का सक्सेना पर आरोप है कि उसने वकील गौतम खेतान के साथ साठ-गांठ कर अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी के लिए कॉरपोरेट ढांचा उपलब्ध कराया था, जिससे विभिन्न राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों और वायुसेना अधिकारियों को भुगतान किया जा सके और काले धन को सफेद बनाया जा सके।