छात्र-छात्राओं के विरोध-प्रदर्शन के बाद इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन को एक बार फिर उनकी मांग माननी पड़ी है। छात्रों की मांग पर कुलपति प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितता की जांच कराने के लिए राजी हो गए हैं। कुलपति दफ्तर में सोमवार को तालाबंदी कर डटे रहे विद्यार्थियों के सामने अफसरों ने घोषणा की कि परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) की तीन सदस्यीय कमेटी जांच करेगी। शोध प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी की जांच करने वाले सदस्य ही इसमें शामिल होंगे।
विद्यार्थियों से बुधवार या ईद की छुट्टी पड़ने पर बृहस्पतिवार तक साक्ष्य समेत बिंदुवार शिकायती पत्र देने के लिए कहा गया है। साक्ष्य तथा शिकायती पत्र प्रवेश भवन में देना है। उधर, छात्रसंघ की निवर्तमान अध्यक्ष ऋचा सिंह ने मोबाइल नंबर जारी कर विद्यार्थियों से प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी की बाबत साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की है।
कमेटी ने शिकायतों की जांच के लिए चार कार्यदिवस का समय मांगा है। इसके बाद 14 जुलाई को विद्यार्थी जिला प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में समिति के सामने भी अपनी बात रख सकेंगे। इसके एक-दो दिन बाद कमेटी रिपोर्ट सौंप देगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रवेश परीक्षा पर निर्णय लिया जाएगा, जो सभी को मान्य होगा। अफसरों की इस घोषणा के बाद आंदोलन कर रही छात्रसंघ की निवर्तमान अध्यक्ष ऋचा सिंह तथा अन्य छात्रों ने 14 जुलाई तक कोई आंदोलन न करने की घोषणा की और फिलहाल गतिरोध टल गया है।
छात्रसंघ पदाधिकारियों से वार्ता के लिए तैयार नहीं हुए
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी
विश्वविद्यालय में सोमवार को नए सत्र की शुरुआत हुई, लेकिन पहला दिन ही अराजकता की भेंट चढ़ गया। विद्यार्थियों के आंदोलन की वजह से विश्वविद्यालय में ज्यादातर प्रशासनिक कार्य बाधित रहे। पूर्व घोषणा के अनुसार छात्रसंघ भवन पर छात्र-छात्राओं का जमावड़ा हुआ। वहां से तकरीबन सवा बारह बजे वे जुलूस बनाकर कुलपति दफ्तर पर पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने प्रवेश परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों से दिन में 11 बजे वार्ता का समय दिया था, लेकिन वह छात्रसंघ पदाधिकारियों से वार्ता के लिए तैयार नहीं हुए।
ऐसे में विरोध और तेज हो गया। ऐसे में कुलपति की अन्य विद्यार्थियों से भी वार्ता नहीं हो पाई। ऋचा की अगुवाई में पहुंचे विद्यार्थियों ने विरोध-प्रदर्शन के बीच तकरीबन दो बजे कुलपति दफ्तर के लिए जाने वाले तीनों रास्तों पर ताला जड़ दिया। इसकी वजह से काफी देर तक कई अफसर भी अंदर बंद रहे। गतिरोध एवं तनाव बढ़ता देख जिला और पुलिस प्रशासन के अफसरों ने हस्तक्षेप किया। एडीएम सिटी, एसीएम, सीओ और सुरक्षा एवं छात्र सलाहकार प्रोफेसर माता अंबर तिवारी ने कुलपति से वार्ता की। वार्ता के बाद अफसरों ने घोषणा की कि कुलपति जांच के लिए राजी हैं। जांच में आरोप सही पाए गए तो परास्नातक प्रवेश परीक्षा भी निरस्त कर दी जाएगी।
इस पर छात्र-छात्राओं का कहना था कि इसके लिए समय निर्धारित की जाए। साथ में यह भी सुनिश्चित किया जाए कि फैसला होने तक प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं होगा। इस पर एक बार फिर वार्ता के बाद अफसरों ने 14 जुलाई तक जांच पूरी होने की घोषणा की। इसके बाद विद्यार्थियों ने 14 जुलाई तक के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया, लेकिन चेतावनी दी कि इसमें हीलाहवाली हुई तो वे एक बार फिर तेज आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। पीआरओ प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रवेश परीक्षा की बाबत निर्णय लिया जाएगा। आंदोलन के दौरान डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर हर्ष कुमार, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आईआर सिद्दीकी और पुलिस विभाग के अफसरों के साथ बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रही।