अतुल सुभाष आत्महत्या मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने निकिता सिंघानिया के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एसआर कृष्ण कुमार ने कहा कि शिकायत में सभी तथ्य पहले ही सामने आ चुके हैं, जिससे एफआईआर को रद्द करने का कोई कारण नहीं है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को अतुल सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि एफआईआर में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों के सभी तत्व मौजूद हैं।
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हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार
कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एसआर कृष्ण कुमार ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि शिकायत में सभी तथ्य पहले ही सामने आ चुके हैं, जिससे एफआईआर को रद्द करने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत और एफआईआर में आत्महत्या के लिए उकसाने का पूरा विवरण दिया गया है।
बता दें कि अतुल सुभाष, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे उन्होंने अपनी पत्नी और ससुराल वालों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्होंने पिछले महीने आत्महत्या कर ली। उनकी मौत ने पूरे देश में महिलाओं और गुजारा भत्ते पर सख्त कानून की मांग को लेकर आक्रोश पैदा किया। अतुल के भाई की शिकायत पर उनकी पत्नी निकिता, मां निशा और भाई अनुराग के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया था।
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सिंधानिया के वकील ने दी थी चुनौती
अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद उनके भाई द्वारा दर्ज एफआईआर को सिंघानिया के वकील ने चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने कहा कि इसमें सभी जरूरी जानकारी दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच और सामग्री की जानकारी मांगी और मामले की सुनवाई को स्थगित कर दिया।
शनिवार को पत्नी निकिता को मिली थी जमानत
गौरतलब है कि निकिता सिंघानिया और उनके परिवार के सदस्यों को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में शनिवार को बेंगलुरु की अदालत से अंतरिम जमानत मिल गई थी। निकिता को 15 दिसंबर को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनकी मां और भाई को प्रयागराज से गिरफ्तार कर बेंगलुरु की अदालत में पेश किया गया था।