अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल राव (फाइल फोटो)
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बुधवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर एक वक्त में एक वकील को ही बहस करने की इजाजत मिलनी चाहिए। अटॉर्नी जनरल इस बात से दुखी थे कि सुनवाई के दौरान एक वक्त पर कई वकील अपनी बातें रख रहे थे।
नागरिकता संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हो रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की तरह कोर्ट रूम के बीच में एक पोडियम होना चाहिए जिससे कि एक वक्त में ही एक वकील ही बहस कर सके।
वेणुगोपाल ने कहा, 'हमें इस मामले में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का अनुसरण करना चाहिए। वहां के सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट रूम के मध्य में एक पोडियम होता है जिससे कि एक वक्त एक ही वकील अपनी बात रख सके। यहां की तरह नहीं कि एक ही वक्त में कई वकील बोलें। इससे कुछ समझना व सुनना मुश्किल हो जाता है।’
वास्तव में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की लेकिन कई अन्य वकील भी कूद गए और सभी एकसाथ बोलने लगे। इस बात से नाराज अटॉर्नी जनरल ने कहा, 'यह शायद एकमात्र ऐसी अदालत है जहां एक ही साथ कई वकील बोलते हैं। ऐसा कहीं और नहीं होता।’
इस पर चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा, 'हमें नहीं मालूम कि ऐसा किसी अन्य अदालत में होता है या नहीं।’ जवाब में वेणुगोपाल ने कहा कि ऐसा पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में होता है। मैं वहां जा चुका हूं। वहां ऐसा नहीं होता। वहां एक पोडियम होता है और एक वकील ही वहां से अपनी बातें रखता है।
साथ ही अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हाईकोर्ट में स्थिति बेहतर है। वकील जब हाईकोर्ट में जाते हैं तो वहां अनुशासन में रहते हैं लेकिन यहां आने पर बदल जाते हैं।