केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया कि अंतरिक्ष में कदम रखने वाले भारत के दूसरे और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर जाने वाले देश के पहले अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के इस सप्ताहांत भारत आने की संभावना है।
सिंह ने बताया कि शुक्ला अपने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इसके बाद वह अपने परिवार से मिलने लखनऊ जाएंगे। शुक्ला 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह में भाग लेने के लिए दिल्ली लौटेंगे। शुक्ला एक्सिओम-4 निजी अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा थे, जो 25 जून को फ्लोरिडा से रवाना हुआ और 26 जून को आईएसएस से जुड़ा। उन्होंने अमेरिका की पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज उजनांस्की-विस्निवस्की और हंगरी के टिबोर कापु के साथ 18 दिन के मिशन के दौरान 60 से अधिक प्रयोग और 20 जनसंपर्क सत्र किए।
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भारत के गगन यान मिशन के लिए बेहद अहम एक्सिओम-4 मिशन
एक्सिओम-4 मिशन का चालक दल को लेकर जा रहा ड्रैगन अंतरिक्ष यान 15 जुलाई को सैन डिएगो तट के पास प्रशांत महासागर में उतरा जिससे मिशन का सफल समापन हुआ। यह भारत के गगनयान के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
'भारत अब दर्शक नहीं, भागीदार है'
अंतरिक्ष से वापसी के बाद शुभांशु शुक्ला ने कहा, 'दशकों से अंतरिक्ष एक वैश्विक साझेदारी का क्षेत्र रहा है। लेकिन इस मिशन का सबसे खास पल वह था, जब मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की, और मेरे पीछे भारत का तिरंगा अंतरिक्ष में लहरा रहा था।' उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत के लिए प्रतीक था कि हम अब अंतरिक्ष की वैश्विक बातचीत में केवल दर्शक नहीं, बल्कि समान भागीदार के रूप में शामिल हैं।
'अब उड़ान से डर नहीं, अनुभव के साथ लौटे हैं'
अपनी वापसी के बाद शुभांशु शुक्ला ने हंसते हुए कहा, 'यह मेरी अंतरिक्ष से लौटने के बाद पहली बातचीत है- और अब मुझे खुद को स्थिर करने की जरूरत नहीं है कि मैं तैर न जाऊं।' यह बात उन्होंने शून्य गुरुत्वाकर्षण से धरती के सामान्य गुरुत्वाकर्षण में लौटने के अनुभव को दर्शाने के लिए कही।
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विज्ञान के साथ जुड़ी उम्मीदें और प्रेरणा
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि उन्होंने अंतरिक्ष में स्टेम सेल्स पर प्रयोग किए, और बबल एक्सपेरिमेंट भी किया जो काफी चर्चित रहा। 'अंतरिक्ष में विज्ञान करना मजेदार होता है, लेकिन असली मकसद यह था कि हम भारत के युवाओं को प्रेरित कर सकें।' उन्होंने कहा कि इस मिशन का सबसे बड़ा हासिल यह है कि भारत के बच्चे अब खुद को एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में देखने का सपना देख सकते हैं- और अब वह सपना असंभव नहीं रहा।
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