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बिजली परियोजनाओं में 2.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश पर संकट के बादल, तत्काल कार्रवाई की जरुरत

Sun, 10 Feb 2019 09:48 PM IST
Nilesh Kumar भाषा, नई दिल्ली
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बिजली परियोजना - फोटो : अमर उजाला
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बिजली परियोजनाओं में 2.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश संकट का सामना कर रहा है। इस समस्या से निबटने को समय रहते तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। इन तापीय बिजली परिसंपत्तियों में घरेलू कोयला, आयातित कोयला और गैस आधारित परियोजनाएं शामिल हैं। एसोचैम-ग्रांट थॉर्नटन ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में यह बात कही। 

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रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का बिजली क्षेत्र इन दिनों सबसे ज्यादा संकट से गुजरने वाले क्षेत्रों में से एक है। बिजली क्षेत्र की कंपनियों को दिये गये करीब एक लाख करोड़ रुपये के ऋण एनपीए हो गए हैं या फिर पुनर्गठित किये गए हैं। 

एसोचैम-ग्रांट थॉर्नटन ने 'भारतीय तापीय बिजली क्षेत्र में संकटग्रस्त संपत्तियां' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा कि हालिया अनुमान के मुताबिक, करीब 66,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विभिन्न चरणों में वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। 
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इसमें 54,800 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली परियोजनाएं, 6,830 मेगावाट की गैस आधारित और 4,570 मेगावाट की पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों में ऋणदाताओं का करीब तीन लाख करोड़ रुपये फंसा हुआ है, जो कि खतरे की घंटी है।

इन कारणों से आई दिक्कतें

रिपोर्ट में कहा गया कि इन तापीय परियोजनाओं को नियमित ईंधन आपूर्ति समझौते का अभाव, बिजली खरीद समझौते की कमी, इक्विटी और कार्यशील पूंजी में निवेश करने में प्रवर्तकों के नाकाम रहने तथा नियामकीय बाधाओं जैसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि इन संकटग्रस्त बिजली संपत्तियों के लिए सर्वव्यापी समाधान नहीं है। इनके लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाने की जरूरत है।

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