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एसेट रिकवरी इंटरएजेंसी नेटवर्क: अपराधियों से संपत्ति छीनने की राह में क्या नौकरशाही बना रही रोड़ा? ईडी ने जताई

Mon, 28 Sep 2026 08:46 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
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एसेट रिकवरी इंटरएजेंसी नेटवर्क, एशिया पैसिफिक (एआरआईएन-एपी)  की 11वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) - फोटो : अमर उजाला
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एसेट रिकवरी इंटरएजेंसी नेटवर्क, एशिया पैसिफिक (एआरआईएन-एपी)  की 11वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) सोमवार को नई दिल्ली में शुरू हुई। 2026 के लिए 'एआरआईएन-एपी' की भारत की अध्यक्षता के तहत, इस नेटवर्क के लिए भारत की नोडल एजेंसी, डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी) इस बैठक की मेजबानी कर रही है। ईडी निदेशक ने भारत की अध्यक्षता में नेटवर्क के लिए दो प्राथमिकताएं तय की हैं। अनुरोधों पर तेजी से कार्रवाई और मामलों की जांच पूरी करना। उन्होंने सुझाव दिया कि जहां सदस्य जानकारी साझा कर सकते हैं, वहां नेटवर्क उन मामलों की संख्या पर भी नजर रखे, जिनमें एआरआईएन-एपी के जरिए सहयोग के बाद असल में संपत्ति जब्त की गई और वापस लौटाई गई। काम करने वालों की प्रतिबद्धता के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय अनुमान बताते हैं कि अपराध से हुई जिस कमाई को आखिरकार जब्त किया जाता है, वह उम्मीद से बहुत कम है।
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कानून के बजाय नौकरशाही से जुड़ी अड़चनें 
निदेशक ने सदस्यों से इसके कारणों पर विचार करने का आग्रह किया।  उन्होंने कहा कि काम करने वाले सही तौर पर सावधानी बरतते हैं, लेकिन वे घरेलू कानूनों की बारीकियों में उलझ सकते हैं। कुछ रुकावटें असल में कानूनी अड़चनों के बजाय नौकरशाही से जुड़ी हो सकती हैं। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे इस बात पर विचार करें कि उनके मामलों में कौन सी मुश्किलें वास्तव में कानून की ज़रूरत हैं और किन्हें अलग तरीके से हल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी प्रणालियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन मकसद एक ही रहता है, अपराधियों के हाथों से संपत्ति को छीनना। 28 सितंबर से एक अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाली इस बैठक में नेटवर्क के सदस्य क्षेत्रों और ऑब्जर्वर संगठनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ-साथ विभिन्न भारतीय एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। 

संपर्क बिंदुओं का एक अनौपचारिक नेटवर्क 
'एआरआईएन-एपी', कानून लागू करने वाली एजेंसियों और न्यायिक संपर्क बिंदुओं का एक अनौपचारिक नेटवर्क है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपराध से हुई कमाई को वापस पाने के सभी पहलुओं पर काम करता है। नवंबर 2013 में कोरिया में शुरू किया गया और यूरोप के सीएआरआईएन नेटवर्क की तर्ज पर बनाया गया यह नेटवर्क, अपराधियों के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई सुनिश्चित करता है। इसमें उन क्षेत्रों के साथ भी सहयोग शामिल है, जिनके साथ कोई 'आपसी कानूनी सहायता संधि' नहीं है। इसमें सभी तरह के अपराधों से हुई कमाई शामिल है, और हर सदस्य दो संपर्क बिंदुओं को नॉमिनेट करता है-एक कानून लागू करने वाली एजेंसी से और एक न्यायिक या अभियोजन प्राधिकरण से। इस नेटवर्क का कामकाज एक प्रेसिडेंसी (जिसकी अध्यक्षता हर साल बदलती है), एक स्टीयरिंग ग्रुप और एक सचिवालय के ज़रिए चलाया जाता है। कोरिया का एसपीओ शुरू से ही इसका सचिवालय रहा है। 'एआरआईएन-एपी', में अभी 32 सदस्य देश/क्षेत्र और 10 ऑब्ज़र्वर शामिल हैं, जिनमें इंटरपोल, यूएनओडीसी, वर्ल्ड बैंक और दूसरे क्षेत्रों के एसेट रिकवरी नेटवर्क शामिल हैं। 
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कुछ ही घंटों में सीमाओं के पार चली जाती है कमाई
ईडी निदेशक ने कहा, यह कार्यक्रम बहुत अहम है। अपराध से मिली जो कमाई कुछ ही घंटों में सीमाओं के पार चली जाती है, उसे तभी वापस पाया जा सकता है। यह तभी संभव है जब अलग-अलग देशों/क्षेत्रों की एजेंसियां मिलकर काम करें। रिकवरी तभी पूरी मानी जाती है जब संपत्ति पीड़ितों और सरकार को वापस मिल जाए। इस क्षेत्र के जानकारों को नई दिल्ली बुलाकर, भारत उस भरोसे और तेज़ी को बनाने में मदद कर रहा है, जिस पर यह सहयोग टिका है। संपत्ति की रिकवरी कई चरणों की एक प्रक्रिया है। जैसे कि पता लगाना, सुरक्षित करना, जब्त करना, और प्रबंधन व वापसी। इनमें से किसी भी चरण में मामला विफल हो सकता है। शुरुआती चरणों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग सबसे मजबूत होता है, जबकि सीमा-पार जब्ती, विदेशी आदेशों को लागू करने और वापसी के मामलों में अक्सर देरी होती है। बैठक का विषय नेटवर्क से यह अपेक्षा करता है कि वह इन बाद के चरणों पर भी उतना ही ध्यान दे, जितना लंबे समय से शुरुआती चरणों पर दिया जाता रहा है।

गेमिंग प्लेटफॉर्म और साइबर-आधारित धोखाधड़ी
निदेशक ने बताया कि हाल के मामलों में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग प्लेटफॉर्म, साइबर-आधारित धोखाधड़ी (जिसमें तेज़ी से वर्चुअल एसेट्स में बदलाव किया जाता है), पेमेंट एग्रीगेटर्स और गेटवे का दुरुपयोग, शेयर की कीमतों में हेरफेर, और बाहरी रेमिटेंस में मदद करने वाले पेशेवर सर्टिफिकेशन्स के दुरुपयोग से जुड़ी तेज़ी से आगे बढ़ने वाली और मुख्य रूप से सीमा-पार की कमाई शामिल है।

खुफिया जानकारी के तौर पर साझा
'एआरआईएन-एपी' का 'प्रैक्टिशनर-टू-प्रैक्टिशनर' (विशेषज्ञों के बीच सीधा संपर्क) चैनल, औपचारिक आपसी कानूनी सहायता का पूरक है। यह संपत्तियों के बिखरने या गायब होने से पहले ही उन तक पहुँचने में मदद करता है। निदेशक ने सदस्यों को भरोसा दिलाया कि आने वाले अनुरोधों पर कार्रवाई करना डायरेक्टरेट की सर्वोच्च प्राथमिकता है। डायरेक्टरेट के पास बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संस्थाओं से सीधे जानकारी और रिकॉर्ड हासिल करने की कानूनी शक्तियां हैं। इसकी मदद से नेटवर्क के ज़रिए मांगी गई जानकारी को आमतौर पर 'इंटेलिजेंस' (खुफिया जानकारी) के तौर पर तेज़ी से साझा किया जा सकता है।  
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