कुछ साल पहले तक पश्चिम बंगाल में बीजेपी ज्यादा ताकतवर नहीं थी, लेकिन राज्य में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। बीजेपी अब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की मुख्य विपक्षी पार्टी बन चुकी है। राज्य बीजेपी में फिलहाल पांच महासचिवों के पद हैं। देवश्री चौधरी के सांसद और फिर मंत्री बनने के बाद से एक पद खाली है।
बंगाल बीजेपी के एक नेता ने बताया कि राज्य में अब संभवत: सात महासचिव होंगे। एक कार्यकारी अध्यक्ष का पद बनाने की बात भी चल रही है। राज्य इकाई में बदलाव के आसार पिछले दिसंबर में पार्टी के आंतरिक चुनावों में ही दिखने लगे थे। 39 में से 15 जिलों में अध्यक्षों को एक साथ बदल दिया गया।
पिछले दो दशकों में पार्टी के जिला स्तरीय संगठन में यह सबसे बड़ा बदलाव था। बेहतर समन्वय के लिए अब कई जिलों को एक साथ रखा जा सकता है। कोलकाता और उसके उपनगरीय क्षेत्रों को चार जिलों में बांटा जा रहा है। बाद में इन्हें दो जिलों में बांटा जाएगा।
टीएमसी ने गहा, संगठन नहीं सोच बदले बीजेपी
राज्य की सत्ता में बने रहने के लिए बीजेपी से लड़ रही तृणमूल कांग्रेस हालांकि पुनर्गठन को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही। टीएमसी के राज्य महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि बीजेपी को पहले अपनी सोच का विस्तार करना होगा। पार्टी के नेताओं को समाज में घृणा फैलाने से बाज आना होगा, लेकिन बीजेपी के लिए ऐसा करना संभव नहीं है।