कुलदीप शर्मा, जो कि पूर्व हुड्डा सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे, उन्होंने अपनी पत्नी को संपत्ति में हिस्सेदार बना रखा है। पांच वर्ष के दौरान उनकी संपत्ति में 189 प्रतिशत का इजाफा हो गया। संपत्ति चार से 11 करोड़ पर पहुंच गई। कई बार के विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा ने अपनी पत्नी को रैंट, खेती और डेयरी के धंधे में सांझेदार बना रखा है। उनकी आय भी 42 प्रतिशत बढ़ चुकी है। दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पत्नी आशा हुड्डा प्रॉपर्टी, रैंट, अन्य बिजनेस और खेतीबाड़ी में हिस्सेदार हैं।
इनकी संपत्ति 2014 में आठ करोड़ थी जो कि अब 15 करोड़ हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद बीरेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी प्रेमलता को कारोबार में साझेदार बना रखा है। वे विधायक का चुनाव लड़ रही हैं। इनकी संपत्ति भी 45 प्रतिशत बढ़ गई। पूर्व विधायक और मौजूदा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी परमिंद्र ढुल की संपत्ति में 53 फीसदी का इजाफा हुआ है। उनकी पत्नी फार्मिंग में सांझेदार है।
इसी तरह रघुबीर कादियान, महिपाल ढांढा, असीम गोयल, रईस खान, कृष्णलाल पंवार, सुखविंद्र की संपत्ति भी अच्छी खासी बढ़ चुकी है। बलकौर सिंह जो कि शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर विधायक बने थे, पांच साल में उनकी संपत्ति 369 प्रतिशत बढ़ चुकी है। यानी 2014 में उनकी संपत्ति 28 लाख थी, इस बार वह एक करोड़ के पार चली गई है।
पत्नी को साझेदार न बनाने वाले नेताओं की संपत्ति में कम हुआ इजाफा
एडीआर रिपोर्ट में डॉ. पवन सिंह के कारोबार में उनकी पत्नी का जिक्र नहीं है। उनकी संपत्ति में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। बलवंत सिंह की संपत्ति 21 फीसदी ही बढ़ सकी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला की संपत्ति में उनकी पत्नी के साझेदार होने का जिक्र नहीं है। नतीजा, उनकी संपत्ति केवल नौ फीसदी ही बढ़ सकी। पांच साल में उन्हें केवल 42 लाख रुपये का फायदा हुआ है। अब उनकी आय चार करोड़ से ज्यादा है।
रामचंद्र कंबोज की संपत्ति एक फीसदी घट गई है। रणबीर गंगवा की आय 16 फीसदी कम हो चुकी है। पांच साल पहले उनकी आय 10 करोड़ थी जो अब नौ करोड़ रह गई है। इसी तरह ललित नागर की संपत्ति भी 15 प्रतिशत कम हो गई है। पहले उनके पास 11 करोड़ रुपये की संपत्ति थी जो कि अब नौ करोड़ रह गई है।