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हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में लोकसभा के साथ होंगे विधानसभा चुनाव

Mon, 21 Jan 2019 06:03 AM IST
shubham हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली

सार

  • अक्तूबर से नवंबर के बीच खत्म हो रहा है तीनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल
  • झारखंड में बनी सहमति, हरियाणा पर पक्का फैसला जींद उपचुनाव के बाद
  • मोदी मैजिक के सहारे फिर इन राज्यों में चुनावी वैतरणी पार करने की है रणनीति
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विस्तार
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सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए 10 फीसदी आरक्षण सुरक्षित कराकर विपक्षी दलों पर मानसिक बढ़त बना चुकी भाजपा ने अब अगले कदम की तैयारी में है। पार्टी अपने शासन वाले तीन राज्यों हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में फिर से मोदी मैजिक के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत भिड़ा रही है। इसके लिए इन तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव भी आगामी लोकसभा चुनावों के साथ ही कराए जा सकते हैं। इन तीनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अक्तूबर से नवंबर के बीच खत्म हो रहा है।

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भाजपा सूत्रों ने बताया कि झारखंड में झामुमो, राजद, कांग्रेस और झाविपा वाले विपक्षी महागठबंधन की तस्वीर करीब-करीब साफ हो चुकी है। इसके चलते पार्टी नेतृत्व वहां समय से पहले विधानसभा भंग कराकर लोकसभा के साथ ही दोनों चुनाव करा लेना चाहता है। राज्य इकाई ने भी अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया है, जिसने दोनों चुनाव एक साथ कराने की तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं।

हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल इसी साल अक्टूबर में खत्म हो रहा है। वहां विपक्षी कांग्रेस में फैली जबरदस्त गुटबाजी और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) में दो फाड़ हो जाने से सियासी समीकरण बदल गए हैं, जिन्हें केंद्रीय नेतृत्व बड़ा मौका मान रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 31 जनवरी को जींद विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजे आते ही हरियाणा में दोनों चुनाव एक साथ कराने पर अंतिम फैसला किया जाएगा। हालांकि इस उपचुनाव में हार या जीत से नेतृत्व के फैसले पर असर नहीं होगा, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व हालिया शहरी निकाय चुनाव में मिली सफलता का इस उपचुनाव में दोहराव होने या नहीं होने की बात परख लेना चाहता है। 
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महाराष्ट्र में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां एनडीए की घटक शिवसेना लगातार अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर रही है। केंद्रीय नेतृत्व यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराना चाहता है, लेकिन मोदी सरकार में सूबे से आने वाले एक वरिष्ठ मंत्री और राज्य इकाई के कुछ अन्य नेता इससे सहमत नहीं हैं। चूंकि आम चुनाव की अधिसूचना मार्च में जारी होगी। इसलिए पार्टी नेतृत्व अगले महीने इस मुद्दे पर फिर से विचार-विमर्श का दौर शुरू करेगा।

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पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसा करने से न सिर्फ राज्य सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान को थामने में मोदी मैजिक का सहारा मिलेगा, वहीं पार्टी के एक देश एक चुनाव अभियान को भी मजबूती मिलेगी। दरअसल लोकसभा के साथ ही आंध्रप्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव होंगे। सरकार जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव भी इसी के साथ कराना चाहती है। ऐसे में अगर भाजपाशासित तीन राज्य भी इसमें शामिल हुए तो ऐसे राज्यों की संख्या बढ़ कर 8 हो जाएगी। रणनीतिकारों को लगता है कि वर्ष 2014 के चुनाव की तरह इस चुनाव में भी मोदी मैजिक के सहारे इन राज्यों की चुनावी नैया पार लग जाएगी।
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