वोटिंग के बाद सेल्फी लेती युवतियां (File photo)
चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका किस कदर अहम हो चली है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव आयोग की भी इस पर पैनी नजर है। खासतौर पर सोशल पर फेक न्यूज को लेकर आयोग ने सोशल साइटों को सख्त निर्देश दिए हैं। खुद मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने भी फेक न्यूज से निपटने को सबसे बड़ी चुनौती करार दिया था। उन्होंने कहा था कि मतदाताओं को लालच देने के लिए अब बड़ी तकनीकी कंपनियों की मदद ली जा रही है।
कैंब्रिज एनालिटिका विवाद
चुनाव आयोग की चिंता की वजह यह भी है कि हाल के समय में फेसबुक को लेकर हुआ विवाद किसी से छुपा हुआ नहीं है। ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका इसे लेकर विवादों में घिर चुकी है। उस पर आरोप लगा कि वह यूजर्स की निजी जानकारियों का इस्तेमाल चुनावों में करता आ रहा है। इस कंपनी ने फेसबुक से 8.7 करोड़ लोगों का प्रोफाइल डाटा लीक कर कई देशों के चुनाव परिणाम प्रभावित किया। फेसबुक ने इस साल अप्रैल में 5.62 लाख भारतीय लोगों के डाटा लीक होने की बात स्वीकार की थी। कंपनी की तरफ से इसमें कैंब्रिज एनाटलिटिका का नाम ही लिया गया था। फेसबुक ने कहा था कि ब्रिटिश कंपनी ने इसके लिए उनकी सहमति नहीं ली।
मामले ने इस कदर तूल पकड़ा कि भारत सरकार को इसमें दखल देना पड़ा। अगस्त 2018 में सीबीआई ने इस मामले में जांच भी शुरू की। इस मामने ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। विवाद के चलते इस कंपनी के सीईओ को इस्तीफा देना पड़ा और फिर कंपनी ने अपना कारोबार समेटने का भी एलान किया। वहीं, इस मामले में फेसबुक के मार्क जकरबर्ग ने यूजर्स से माफी भी मांगी थी।