केरल में कांग्रेस का 'पांच गारंटी' का वादा
केरल में आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राज्य में यूडीएफ की सरकार बनने पर लागू की जाने वाली पांच 'गारंटी योजनाओं' की घोषणा की है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण पर केंद्रित है। राहुल गांधी ने तिरुवनंतपुरम में 'पुथुयुगा यात्रा' के समापन समारोह में ये घोषणाएं कीं।
प्रमुख वादे इस प्रकार हैं:
- महिलाओं के लिए निःशुल्क बस यात्रा: सभी महिलाओं को सार्वजनिक बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी।
- छात्रों के लिए मासिक सहायता: कॉलेज जाने वाली छात्राओं को ₹1,000 की मासिक आर्थिक सहायता दी जाएगी।
- कल्याणकारी पेंशन में वृद्धि: वरिष्ठ नागरिकों और अन्य पात्र व्यक्तियों के लिए मासिक कल्याणकारी पेंशन को बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह किया जाएगा।
- स्वास्थ्य बीमा योजना: पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के नाम पर एक स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत प्रत्येक परिवार को ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा।
- लघु व्यवसायों के लिए ब्याज-मुक्त ऋण: छोटे व्यवसायों को ₹5 लाख तक का ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित मंत्री: वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए एक विशेष मंत्री नियुक्त किया जाएगा।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मदुरै में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) 'विश्वासघात का पर्याय' बन गई है, इसी कारण ओ. पन्नीरसेल्वम ने सी.एन. अन्नादुरई द्वारा स्थापित डीएमके का दामन थामा है। स्टालिन ने पूर्व पार्टी प्रमुख एम. करुणानिधि द्वारा ओ. पन्नीरसेल्वम को 'असली तमिलियन' कहने का भी स्मरण किया। उन्होंने पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें 'हमेशा मुस्कुराने वाले', सुसंस्कृत और वफादार बताया। स्टालिन ने सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक शिष्टाचार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
'स्वच्छ और शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद'
वहीं, कोच्चि में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि स्वच्छ और शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और कोई अयोग्य व्यक्ति उसमें शामिल न हो।
शनिवार को कोच्चि में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्ञानेश कुमार ने बताया कि केरल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि केरल में लोकतंत्र की परंपरा बहुत पुरानी है और इस राज्य ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की सीख दी है। उन्होंने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका केरल से लंबे समय का जुड़ाव रहा है। उन्होंने करीब 18 साल तक यहां काम किया है और लगभग 22 साल पहले एर्नाकुलम जिले के कलेक्टर भी रह चुके हैं। इसलिए वे राज्य की लोकतांत्रिक परंपराओं और चुनावी व्यवस्थाओं को करीब से जानते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि केरल में करीब 1000 साल पहले ‘नट्टुकुट्टम’ नाम की ग्राम सभाएं हुआ करती थीं। इन सभाओं में गांव के लोग मिलकर फैसले लेते थे। उन्होंने कहा कि यही व्यवस्था सामूहिक निर्णय लेने की लोकतांत्रिक सोच की शुरुआती नींव बनी। ज्ञानेश कुमार ने यह भी कहा कि चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने में भी केरल का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि 1960 में यहां पहली बार आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) बनाई गई थी, जिसे बाद में सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद चुनाव आयोग ने अपनाया। आज इसे ही मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट कहा जाता है।
इसके अलावा केरल चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भी अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि 1982 में परवूर विधानसभा क्षेत्र में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का पायलट प्रयोग किया गया था। यह प्रयोग बाद में पूरे देश में चुनावों के दौरान लागू किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद तरीके से कराए जाएं, ताकि लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।