यूपी में चल रही राजनेताओं की रैली
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कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। देश में शुक्रवार को 24 घंटे के अंदर कोरोना के 16,746 नए मरीज सामने आए। 7,585 रिकवरी हुईं और 220 लोगों की कोरोना से मौत हुई। इससे पहले 30 दिसंबर को 13,154 और 29 दिसंबर को 9,195 केस आए थे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में कोरोना फिर बढ़ रहा है। वहीं ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। देशभर में के 1270 संक्रमित केस मिले हैं। देर रात के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 198 मामले सामने आए हैं, जिसमें अकेले मुंबई में 190 ओमिक्रॉन संक्रमितों की पुष्टि हुई है। ओमिक्रॉन के 450 मरीज महाराष्ट्र में हैं। वहीं देश की राजधानी दिल्ली में 320 केस मिले हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं।
चूंकि चुनाव आयोग ने भी गुरुवार को लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में यह साफ कर दिया है कि राजनीतिक दल कोरोना प्रोटोकॉल के तहत चुनाव कराने को तैयार तो यह साफ हो चुका है उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर इन पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव तय समय पर होंगे। चुनाव होंगे तो प्रचार भी होगा और रैलियां भी। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि उन पांच राज्यों में कोरोना की क्या स्थिति है, जहां विधानसभा चुनाव होने हैं और जहां नेताओं की रैलियां जारी है।
फिरोजाबाद में महिलाओं का हाथ हिलाकर अभिवादन करतीं प्रियंका गांधी वाड्रा
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उत्तर प्रदेश: गुरुवार को यूपी में कोरोना के 193 मामले सामने आए। इसके साथ ही अब राज्य में कुल सक्रिय मामलों की संख्या 645 तक पहुंच गई है। चिकित्सा स्वास्थ्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने एक प्रेस बयान में कहा, राज्य में कुल 1,86,552 कोविड नमूनों का परीक्षण किया गया और 193 नए मामले सामने आए।” वहीं ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या यहां दो है।
उत्तराखंड: देश के कई राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी कोरोना के नए मामले तेजी से बढ़ने शुरू हो गए हैं। गुरुवार को प्रदेश में कोरोना के 59 नए मामले सामने आए। 28 दिसंबर को प्रदेश में 44, 29 दिसंबर को प्रदेश में 38 केस थे। उत्तराखंड में कुल ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या चार है।
गोवा: 30 दिसंबर तक यहां कोरोना के 261 मामले सामने आए हैं। वहीं कोरोना संक्रमित की संख्या केवल एक है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा कि गोवा आने पर गैर-उच्च जोखिम वाले देशों से यात्रा करने वालों सहित सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का कोविड के लिए परीक्षण किया जाएगा।
पंजाब: ताजा जानकारी के मुताबिक पंजाब में कोरोना के 166 मामले सामने आए हैं। वहीं ओमिक्रॉन संक्रमित केवल एक मरीज है।
मणिपुर: यहां कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 17 है जिसमें ओमिक्रॉन वैरिएंट से एक व्यक्ति संक्रमित है।
चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी
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रैलियां नहीं रुकीं तो क्या होगा ?
कोरोना के बढ़ते मामले और कोरना काल में ही कराए गए पिछले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में यह ध्यान रखने की जरूरत है इसी साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कोरोना के मामले जबरदस्त तरीके से बढ़े थे। सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि चुनाव वाले तमाम राज्यों में चुनावों से पहले और चुनाव के दौरान और बाद में महीने वार के मामलों की संख्या यह साफ करते हैं कि चुनावी गतिविधियों और रैलियों के कारण वहां कोरोना मामलों में असमान्य वृद्धि हुई थी। जून 2021 के लिए पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमितों की संख्या 14 लाख थी। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जहां इस साल चुनाव हुए हैं वहां बड़े पैमाने पर राजनीतिक रैलियां और रोड शो आयोजित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल:
यहां आठ चरणों में होने चुनाव संपन्न हुआ। मतदान 27 मार्च को शुरू हुआ और 29 अप्रैल तक चला। बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए खुद पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने आक्रामक प्रचार अभियान चलाया। टीएमसी अभियान का नेतृत्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया, जो अपने निर्वाचन क्षेत्र नंदीग्राम में पैर में चोट लगने के बाद भी मेगा रैलियों और जनसभाओं में भाग लेती रहीं। एक मार्च को बंगाल में केवल 200 नए मामले दर्ज किए थे। 13 अप्रैल तक रोज आने वाले केस की संख्या 3,798 थी।
इस दौरान 170 मौतें हुईं। चुनाव के आखरी चरण तक पहुंचने पर रोज आनेवाला आंकड़ा करीब 17,500 पर पहुंच गया। दो मार्च तक पश्चिम बंगाल में कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई थी लेकिन दो मई को जब मतगणना हो रही थी कोरोना संक्रमितों की मौतों की संख्या 100 पर पहुंच गई। हालांकि गृह मंत्री अमित शाह ने एक अखबार को दिए एक इंटररव्यू में कहा कि बंगाल में 4,000 मामले ही हैं, इसलिए कोरोना संक्रमण को चुनावी रैलियों से नहीं जोड़ना चाहिए।
पश्चिम बंगाल चुनाव में पहचान पत्र दिखाती महिलाएं
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एक महीने तक सभी पार्टियों और नेताओं ने धुआंधर रैलियां, जन सभाएं और रोड शो किए और इस दौरान संक्रमण बढ़ता रहा। नौ अप्रैल को चुनाव आयोग को यह चेतावनी देनी पड़ी कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए तय नियमों का पालन नहीं हुआ, तो रैलियों पर रोक लगाई जा सकती है। तब तक रोज के केस 200 से बढ़कर 2,000 पर पहुंच गए। भाजपा को छोड़कर अन्य पार्टियों ने धीरे-धीरे अपनी रैलियों पर रोक लगा ली। 17 अप्रैल को आयोग ने शाम सात बजे से सुबह दस बजे तक रैलियों पर रोक लगाई और मतदान से पहले के 'साइलेंस पीरियड' को 48 से 72 घंटे कर दिया। उससे पहले 16 अप्रैल को बंगाल में दो लाख से ज़्यादा नए मामले आ गए थे और एक दिन में हुई मौतों का आंकड़ा एक हजार को पार कर गया।
तमिलनाडु:
एक मार्च को राज्य में केवल 470 नए मामले दर्ज किए थे। 13 अप्रैल तक मामलों की 5,715 मामलों में थी। इस अवधि के दौरान राज्य ने 31,56,777 कोविड परीक्षण किए और 444 मौतें दर्ज कीं। तमिलनाडु में बड़ी सार्वजनिक रैलियों को रोकने के लिए पहले कार्रवाई नहीं करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई गई थी। कोर्ट ने कहा, 'आपकी संस्था कोरोना की दूसरी लहर के लिए अकेले जिम्मेदार है।'
केरल:
एक मार्च को राज्य में 3,496 नए मामले दर्ज किए थे। 13 अप्रैल तक रोज आने वाले मामलों की संख्या 5,615 पर पहुंच गई थी। इस अवधि के भीतर राज्य ने 2,365,420 कोविड परीक्षण किए और 604 संक्रमितों की मौतें हुईं।
वर्चुअल रैली को संबोधित करते अमित शाह
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असम:
एक मार्च को राज्य में केवल 23 नए मामले दर्ज किए थे। 13 अप्रैल को यह संख्या 378 थी। इस दौरान राज्य में 8,18,546 कोविड परीक्षण किए और 26 संक्रमितों की मौते हो गई।
पुडुचेरी
एक मार्च को इस केंद्रशासित प्रदेश में केवल 19 नए मामले आए थे। 13 अप्रैल को रोज आने वाले केस की संख्या 313 हो गई। इस दौरान राज्य ने 80,711 कोविड परीक्षण किए और 27 मौतें हुईं।
उपाय क्या?
चुनाव आयोग के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ओमिक्रॉन का मामला बेशक अभी चुनावी राज्यों में कम है, लेकिन हमें इसे कमजोर नहीं समझना चाहिए और चुनाव आयोग को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। चुनाव संबंधी गतिविधियां और रैलियां कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं यह हमें पूर्व के अनुभवों से सीखना चाहिए। जरूरी है कि आयोग रैलियों पर प्रतिबंध लगाए और वर्चुअल रैलियों को इजाजत दे। ‘जान है तो जहान है’ इस भावना का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब-जब बड़े नेताओं की रैलियां होंगी और भीड़ जुटेगी तो अंदाजा लगाइए कि कोरोना को फैलने का कितना मौका मिलेगा।
रैली में दिखा महिलाओं का उत्साह।
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बाहरी आयोजनों में कितना जोखिम है?
विशेषज्ञों का कहना है कि बंद कमरे में होने वाले आयोजनों की तुलना में बाहर में होने वाले समारोहों या कार्यक्रमों में वायरस के संचरण का जोखिम आमतौर पर बहुत कम होता है। लेकिन कुछ कारक हैं जो राजनीतिक रैलियों जैसे आयोजनों में वायरस के प्रसारण की आशंको को बढ़ा सकते हैं। अगर लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों पर हैं, लंबे समय तक दूसरों के करीब हैं और साामजिक और शारीरिक दूरी का पालन नहीं रहा है तो तो संक्रमण संभव है।