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Assembly Election 2022: डिजिटल रैली में किस पार्टी को बढ़त मिलने की संभावना, दूसरे दलों में क्यों है बेचैनी

प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 10 Jan 2022 01:18 PM IST

सार

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों-उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा के विधानसभा चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा शनिवार को कर दी है। माना जा रहा है कि इतिहास में पहली बार विधानसभा चुनाव बिना रैलियों के होंगे, क्योंकि अभी आयोग ने 15 जनवरी पर इस पर रोक लगाई है लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर इन पाबंदियों पर आगे भी रोक लगने की संभावना जताई जा रही है।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए - फोटो : amar ujala
कोरोना मामलों में ताजा उछाल के कारण चुनाव आयोग ने फरवरी में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में शारीरिक रैलियों और रोड शो पर फिलहाल 15 जनवरी तक प्रतिबंध लगा दिया है। इससे जहां राजनीतिक दलों ने डिजिटल रैली की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं कुछ दलों में इस बात को लेकर बेचैनी भी है कि कहीं वे तकनीक के इस्तेमाल की दौड़ में पिछड़ न जाए। जबकि तकनीक-प्रेमी पार्टी भाजपा इसका बेहतर इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। 

15 जनवरी तक शारीरिक रैलियों पर प्रतिबंध के कारण मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सियासी दलों का फोकस सोशल मीडिया के साथ-साथ स्थानीय टीवी चैनल और स्थानीय समाचार वेबसाइट्स पर रहेगा, खासतौर पर छोटे दलों का। लगभग सभी राजनीतिक दल और नेता सोशल मीडिया के अधिकांश प्लेटफार्मों  जैसे ट्विटर, कू, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम, जूम और यूट्यूब पर जुड़े हुए हैं।  पार्टियां अखबार, टीवी, एफएम रेडियो और मोबाइल फोन पर सक्रिय हैं। पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार करने के कई वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं और इसके लिए पार्टी की रणनीतियां भी अलग-अलग हैं और चिंताएं भीं।




भाजपा पार्टी को बढ़त मिलने की संभावना
भाजपा देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है। केंद्र और कई राज्यों में सरकार होने और  18 करोड़ से अधिक पार्टी सदस्यों की संख्या होने के कारण भाजपा चुनाव प्रचार के लिए खर्च और तकनीक के इस्तेमाल के मामले में भी दूसरी पार्टियों के मुकाबले आगे खड़ी दिखाई देती है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब दूसरी पार्टियों ने सोशल मीडिया के महत्व को समझने में देरी की, भाजपा ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके जबरदस्त और धुआंधार चुनाव प्रचार किया था।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए - फोटो : amar ujala
कोरोना मामलों में ताजा उछाल के कारण चुनाव आयोग ने फरवरी में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में शारीरिक रैलियों और रोड शो पर फिलहाल 15 जनवरी तक प्रतिबंध लगा दिया है। इससे जहां राजनीतिक दलों ने डिजिटल रैली की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं कुछ दलों में इस बात को लेकर बेचैनी भी है कि कहीं वे तकनीक के इस्तेमाल की दौड़ में पिछड़ न जाए। जबकि तकनीक-प्रेमी पार्टी भाजपा इसका बेहतर इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। 

15 जनवरी तक शारीरिक रैलियों पर प्रतिबंध के कारण मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सियासी दलों का फोकस सोशल मीडिया के साथ-साथ स्थानीय टीवी चैनल और स्थानीय समाचार वेबसाइट्स पर रहेगा, खासतौर पर छोटे दलों का। लगभग सभी राजनीतिक दल और नेता सोशल मीडिया के अधिकांश प्लेटफार्मों  जैसे ट्विटर, कू, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम, जूम और यूट्यूब पर जुड़े हुए हैं।  पार्टियां अखबार, टीवी, एफएम रेडियो और मोबाइल फोन पर सक्रिय हैं। पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार करने के कई वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं और इसके लिए पार्टी की रणनीतियां भी अलग-अलग हैं और चिंताएं भीं।



भाजपा पार्टी को बढ़त मिलने की संभावना
भाजपा देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है। केंद्र और कई राज्यों में सरकार होने और  18 करोड़ से अधिक पार्टी सदस्यों की संख्या होने के कारण भाजपा चुनाव प्रचार के लिए खर्च और तकनीक के इस्तेमाल के मामले में भी दूसरी पार्टियों के मुकाबले आगे खड़ी दिखाई देती है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब दूसरी पार्टियों ने सोशल मीडिया के महत्व को समझने में देरी की, भाजपा ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके जबरदस्त और धुआंधार चुनाव प्रचार किया था।

अनिल बलूनी - फोटो : अमर उजाला
सोशल मीडिया के इस्तेमाल में भाजपा रेस में आगे?
विशेषज्ञ कहते हैं कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के मामले में  भाजपा 2014 के चुनाव में ही अकेले रेस में थी। हालांकि देर से सही लेकिन दूसरी पार्टियों ने भी इसके महत्व को समझा, लेकिन फिर भी भाजपा इस मामले में इतना आगे निकल गई है कि कुछ पार्टियों के लिए उसके पास तक पहुंचना फिलहाल मुश्किल लग रहा है। 

एक चुनाव पर्यवेक्षक के मुताबिक अब से पहले के चुनाव में राजनेता सड़कों और गलियों में पसीना बहाते थे। लेकिन अब  राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के पास अब अपना भविष्य तय करने के लिए डिजिटल/आभासी दुनिया है, एक ऐसा परिदृश्य जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था लेकिन आज यह वास्तविकता है और सबको स्वीकार्य भी। उनके मुताबिक यह चुनाव लड़ने का ऐसा तरीका, जो पार्टियों के भारी चुनावी खर्च को कम करने में भी मदद कर सकता है, लेकिन फिर भी इसमें संसाधन चाहिए। जो पार्टियां जितनी धनवान है उनके पास साधन भी उतने ही होंगे।

पार्टी कोरोना शुरू होते ही डिजिटल अभियान की तैयारी में थी 
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने मीडिया को दिए एक बयान में बताया कि उनकी पार्टी कोरोना के प्रकोप के बाद से पिछले दो सालों से डिजिटल और आभासी अभियानों की तैयारी कर रही थी। बलूनी के मुताबिक जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को नवीनतम तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। बूथ स्तर सहित पार्टी के सभी कार्यालयों में वर्चुअल कैंपेन के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं।

देहरादून में पीएम मोदी की रैली - फोटो : अमर उजाला
तीन लाख कार्यकर्ताओं की बड़ी टीम तैयार
जानकारी के मुताबिक सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचने के लिए भाजपा ने तीन लाख कार्यकर्ताओं की एक बड़ी टीम तैयार की है। पार्टी उन तमाम आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है जिसके जरिए लोगों तक पहुंचा जा सकता है। सभी जिला कार्यालयों में वर्चुअल रैली का सेटअप तैयार हो गया है। पार्टी ने वेबिनारों और ई-रैलियों के लिए खास सॉफ्टवेयर भी तैयार किया है।

वहीं पार्टी ने थ्री डी स्टूडियो मिक्स तकनीकी का इस्तेमाल करके 100 से ज्यादा ई रैलियों की योजना बनाई है। इस तकनीकी से दो अलग- अलग स्थानों पर बैठे नेताओं को एक ही मंच पर दिखाया जा सकेगा। यानी एक ऐसा आभासीय मंच तैयार किया जाएगा जिससे लोगों को ऐसा लगेगा कि नेता एक ही मंच पर बैठकर संबोधन कर रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ चुनाव की तारीख की घोषणा से लगभग एक महीने पहले ही पूरे यूपी में रैलियां और अन्य कार्यक्रम कर चुके हैं। पार्टी के सभी जिलों में आईटी संयोजकों की मदद से इन रैलियों का सीधा प्रसारण भी पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से किया गया।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
अन्य पार्टियों की चिंता क्या 
कोरोना के कारण चुनाव आयोग शारीरिक रैलियों और भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रमों पर रोक लगा सकता है, इसका अंदेशा तो लगभग सभी पार्टियों का था। लिहाजा, तैयारी भी सभी पार्टियों ने शुरू कर दी थी और प्रचार की रणनीति में बदलाव किया है। लेकिन भाजपा के खिलाफ खड़े हुए अधिकांश अन्य दलों की चिंता यही है कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भाजपा का मुकाबला कैसे करें? खासतौर पर यह चिंता छोटी पार्टियों की है। 

अखिलेश ने कहा भाजपा के लोगों का डिजिटल स्पेस पर कब्जा
पार्टियों की इसी चिंता को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जाहिर भी कर दिया। उन्होंने शनिवार को चुनावों की घोषणा होने के तुरंत बाद कहा कि भाजपा के लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कब्जा जमाए हुए हैं। जिन कार्यकर्ताओं के पास संसाधन नहीं है वो वर्चुअल रैली कैसे करेंगे और जो छोटी पार्टियां हैं उन्हें कैसे स्पेस मिलेगा। उन्होंने चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि क्षेत्रीय दलों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उचित स्थान मिले। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सीमित संसाधनों के साथ छोटे दलों की सहायता करनी चाहिए। हालांकि अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि वे भाजपा से हर तरीक से लड़ेगें चाहे वर्चुअल हो या कोई और माध्यम।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक ऐसा नहीं है कि सपा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर कोई तैयारी नहीं की है। चूंकि उत्तर प्रदेश में सपा भाजपा के खिलाफ मुकाबले में मुख्य पार्टी मानी जा रही है इसलिए सपा  भी सोशल मीडिया पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं को भाजपा की तरह सोशल मीडिया के इस्तेमाल का वह प्रशिक्षण नहीं दिया गया है, जो भाजपा ने दिया है।

फिर भी पार्टी अन्य पार्टियों की तरह अखिलेश यादव की ई- रैलियों के लिए उन्नत तकनीक के इस्तेमाल पर विचार कर रही है। कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर सक्रिय कर दिया गया है और सोशल मीडिया विंग को ब्लॉक स्तर तक कार्यकर्ताओं को तैयार करने के लिए कहा गया है। कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव कोरोना की वजह से जिन जिलों में अपनी विजय रथ यात्रा नहीं निकाल पाए, वे उन तमाम जिलों में वर्चुअली ही लोगों को संबोधित करेंगे। 

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस का दावा तैयारी पूरी पर स्पेस मिलने का संशय
वहीं कांग्रेस के एक भी एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि चुनाव आयोग को सबको एक समान अवसर मुहैया कराना चाहिए। पीएम मोदी पहले ही विभिन्न राजनीतिक रैलियां कर चुके हैं। वह पिछले एक महीने से दौरा कर रहे हैं और 10-15 से अधिक बार यूपी का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में केवल भाजपा से आर्थिक रूप से कमजोर दलों को ही समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। 

कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका गुप्ता का कहना है कि कांग्रेस ने सबसे पहले अपनी रैलियों और भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाई है और अब प्रियंका गांधी ने फेसबुक पेज पर लोगों से जुड़ना शुरू कर दिया है। हमने अपने डिजिटल प्लान के तहत 1800 से ज्यादा कैंपों के माध्यम से दो लाख  प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की है जिन को विशेष तौर से सोशल मीडिया का भी प्रशिक्षण दिया गया है। बूथ स्तर के संगठन को इसमें प्रशिक्षित किया गया है। ये कार्यकर्ता सभी विधानसभाओं में घूम-घूम कर पार्टी के लिए प्रचार प्रसार करेंगे।

वाल्मीकि समाज के लोगों से संवाद करतीं प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
फेसबुक लाइव सत्र आयोजित करेंगे
प्रियंका गुप्ता ने बताया इसके अलावा कई फेसबुक लाइव सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जहां यूपी के प्रभारी कांग्रेस महासचिव 30 मिनट के सत्र में लोगों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वर्चुअल टाउनहॉल कार्यक्रम भी होगा। कोशिश है कि छोटे-छोटे समूहों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संबोधित किया जाए। इसके लिए हमने कई व्हाट्सअप ग्रूप भी बनाए हैं जहां हजारों की संख्या में लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं। 

उनका कहना है कि हम समझते हैं कि चूंकि जिन राज्यों में लंबे समय से हमारी सरकार नहीं है और हम विज्ञापन नहीं देते हैं, इसलिए मुख्यधारा की मीडिया में हमारी उपस्थिति कम दिखाई देती है, इसलिए  डिजिटल स्पेस पर अपनी मजबूत उपस्थिति दिखाना चाहते हैं। हमें कितना स्पेस मिलेगा, इस पर संशय जरूर है, लेकिन हम पीछे नहीं रहेंगे। 

बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : अमर उजाला
बसपा भी तैयार
वहीं डिजिटली चुनाव प्रचार करने के मामले में उत्तर प्रदेश में बसपा भी पीछे नहीं रहना चाहती है। पार्टी ने अपने प्रचार अभियान को पूरी तरह हाईटेक करने और ई-रैलियां करने का फैसला किया है। सभी पार्टी दफ्तरों पर बड़े-बड़े एलईडी स्क्रीन लगाए जा रहे हैं ताकि कार्यकर्ता बसपा प्रमुख मायावती के संदेशों को आसानी से सुन सकें। मायावती के कार्यालय में ही वार रूम बनाया गया है जहां से सोशल मीडिया पर पहुंच बनाने और जनता तक संदेश पहुंचाने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।

तृणमूल कांग्रेस का दावा-हम पीछे नहीं रहेंगे
वहीं गोवा में चुनाव लड़ रही पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता अशोक तंवर का कहना है कि डिजिटल रैलियों की बात करें या चुनाव प्रचार की, हमारे पास भी सबसे एडवांस और मजबूत सोशल मीडिया टीम है, जो प्रभावी तरीके से अपनी बात जनता तक पहुंचाती है। हम भाजपा का मुकाबला करने में पीछे नहीं रहेंगे। उनका कहना है पार्टी गोवा में डिजिटल पहुंच के मामले में किसी से पीछे नहीं रहेगी, हम भाजपा को चकित करेंगे।

केजरीवाल गारंटी वर्चुअल रैली में संजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
आम आदमी पार्टी के पास मजबूत सोशल मीडिया टीम 
चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया का बेहतर प्रयोग भाजपा के बाद जिस दूसरी पार्टी ने किया, वह है आम आदमी पार्टी। जनआंदोलन से निकली पार्टी ने अपनी  स्थापना के पहले ही सोशल मीडिया का जबरदस्त सहारा लिया और बड़ा जनाधार जुटाया। पार्टी के पास एक मजबूत सोशल मीडिया टीम है। यह टीम पुराने विज्ञापनों के स्पूफ बनाने से लेकर लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्मों के मीम्स बनाने तक में माहिर है।

चुनाव आचार संहिता और कोरोना गाइडलाइन लागू होने के बाद अब आम आदमी पार्टी ने भी वर्चुअल रैली की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में चुनाव लड़ रही है और सभी जगह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ई-रैलियों के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। पार्टी के नेता संजय सिंह के मुताबिक पार्टी की सभी रैलियां वर्चुअल तौर पर होंगी। पार्टी अब जनता के साथ फेसबुक, ट्विटर इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से जनता से संवाद करेगी।
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