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हरियाणा में बहुमत से क्यों दूर दिख रही भाजपा, पढ़िए 250 शब्दों में

Thu, 24 Oct 2019 06:27 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कुमारी सैलजा - फोटो : PTI
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साल 2005 में दो और 2009 में महज चार सीटें। मगर हरियाणा में कमल का ऐसा कमाल हुआ कि 47 सीटें जीत भाजपा ने पहली बार सरकार बना ली। 1982 से 2009 तक भाजपा कुल 47 सीटें जीत पाई थी। मगर 2014 में एक झटके में ही 47 सीटें जीत लीं। मगर पांच साल के बाद ही सत्ता की चाबी भाजपा के हाथों से खिसकती दिख रही है। ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिन्होंने मौजूद रुझानों में अहम भूमिका निभाई। 

प्रशासनिक कुशलता पर उठे सवाल 

  • मनोहर लाल खट्टर के सत्ता संभालने के चार महीने बाद ही सतलोक आश्रम कांड हो गया, जिसे खाली कराने में छह लोगों की जान गई। 
  • 2016 में जाट आरक्षण की आग ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में लिया
  • एक साल बाद ही पंचकूला में राम रहीम के समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया
  • इन घटनाओं की वजह से मनोहर लाल खट्टर की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठने लगे

गैर जाट मुख्यमंत्री 

  • हरियाणा में जाट मुख्यमंत्री का बोलबाला रहा
  • मगर भाजपा ने मनोहर लाल के रूप में एक पंजाबी खत्री को सीएम नियुक्त किया
  • जाट समुदाय इस फैसले से बहुत ज्यादा खुश नहीं दिखा

जाटों का आंदोलन 

  • 2016 में आरक्षण को लेकर जाट समुदाय ने आंदोलन शुरू कर दिया
  • इस आंदोलन में 20 से अधिक जाट युवक पुलिस की गोली का शिकार हुए

राम रहीम फैक्टर

  • मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2014 में कम से कम 12 सीटों पर गुरमीत राम रहीम के समर्थन का भाजपा को फायदा मिला
  • राम रहीम पर हुई कार्रवाई से उसके समर्थक नाराज दिखे
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