राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने गुरूवार को नागपुर में विजयदशमी पर्व मनाया। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राममंदिर, सबरीमाला, अर्बन नक्सल (शहरी माओवाद), अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय, चुनाव में भागीदारी, पाकिस्तान और देश की सुरक्षा मुद्दे पर बेबाक राय रखी। बता दें कि विजयदशमी पर आरएसएस का स्थापना दिवस कार्यक्रम होता है। इस कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी भी शामिल हुए।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के कई विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। भागवत ने कहा कि राम मंदिर बनना गौरव की दृष्टि से आवश्यक है, मंदिर बनने से देश में सद्भावना व एकात्मता का वातावरण बनेगा।
अपने संबोधन में भागवत ने महात्मा गांधी और गुरु नानक का जिक्र करते हुए भारतीय सेना को मजबूत बनाने की बात कही। भागवत ने कहा कि देश के रक्षा बलों को सशक्त बनाने और पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करने के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि वहां नई सरकार आ गई है बावजूद इसके सीमा पर हमले बंद नहीं हुए हैं।
मोहन भागवत ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंध रखने वाले वंचित समूह और प्रताड़ित लोगों को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज में सब त्रुटियों को दूर कर उसके शिकार हुए समाज के अपने बंधुओं को स्नेह व सम्मान से गले लगाकर समाज में सद्भावपूर्ण व आत्मीय व्यवहार का प्रचलन बढ़ाना पड़ेगा।
अर्बन नक्सल की अवधारणा का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि देश में चले छोटे आंदोलनों में भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वाले भी दिखाई दिए। भागवत ने देशवासियों से अपील की कि वे समाज में 'शहरी माओवाद' और 'नव-वामपंथी' तत्वों की गतिविधियों से सावधान रहें।
भागवत ने कहा, 'दृढ़ता से वन प्रदेशों में अथवा अन्य सुदूर क्षेत्रों में दबाए गए हिंसात्मक गतिविधियों के कर्ता-धर्ता एवं पृष्ठपोषण करने वाले अब शहरी माओवाद (अर्बन नक्सलिज्म) के पुरोधा बनकर राष्ट्रविरोधी आंदोलनों में अग्रपंक्ति में दिखाई देते हैं।'
मोहन भागवत ने कहा कि चुनाव में वोट नहीं डालना या नोटा के अधिकार का इस्तेमाल करना, यह दोनों ही चीजें मतदाता की दृष्टि में जो सबसे अयोग्य उम्मीदवार है उसी के पक्ष में जाती हैं। इसलिए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर 100 फीसदी मतदान आवश्यक है।