जैसे-जैसे मौसम सर्द हो रहा है, विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। हर तबके को लुभाने में तमाम पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। खासकर महिलाओं की तरफ हर पार्टी का ध्यान है और इन्हें अपनी तरफ करने के लिए लोक-लुभावने वादे किए जा रहे हैं। सभी दलों को पता है कि महिला मतदाताओं का रुख इन चुनावों की दिशा तय कर सकता है।
मध्यप्रदेश में सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने नई परंपरा शुरू करते हुए महिलाओं के लिए अलग घोषणा पत्र जारी किया। ऐसा सिर्फ मध्यप्रदेश में नहीं हो रहा बल्कि तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में भी पार्टियां महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए दो कदम आगे जा रही हैं।
जारी किए दो दस्तावेज
महिलाओं को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भाजपा ने दो चुनावी दस्तावेज जारी किए हैं- समृद्ध मध्यप्रदेश समृद्धि पत्र और नारी शक्ति संकल्प पत्र। दूसरे पत्र में भाजपा ने मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का वादा किया है। इसी तरह कांग्रेस ने भी छात्राओं को कम दर पर स्कूटी उपलब्ध कराने का वादा किया है। भाजपा ने सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राओं को स्मार्ट फोन और स्वरोजगार स्कीम के तहत पांच लाख छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देने का देने का एलान किया है।
कांग्रेस ने बेटियों के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की मदद और उनकी सुरक्षा के लिए स्मार्टफोन देने का वादा किया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने सत्ता में आने पर घरेलू गैस पर 100 रुपये की छूट देने का एलान करके महिला मतदाताओं को साधने का प्रयास किया है।
छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने सत्ता में वापसी पर महिलाओं को 2 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त लोन और महिला स्वयं सहायता समूह को पांच लाख रुपये का ब्याजमुक्त लोन देने का ऐलान किया है। पार्टी ने मेधावी छात्राओं को मुफ्त में मोपेड देने का भी वादा किया है। कांग्रेस ने भी शहरी महिलाओं के लिए देर रात यात्रा के लिए आधुनिक तकनीक से लैस वाहन उपलब्ध कराने का वादा किया है। मिजोरम में कांग्रेस ने मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने का वादा किया है।
2017 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड चुनाव के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब पार्टियों ने महिला मतदाताओं को प्रेशर कुकर, पेंशन और साइकिल मुहैया कराने का वादा किया था।
आंकड़े बताते हैं पूरी कहानी
छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनाव में महिलाओं का वोट 77 और पुरुषों का 76 फीसदी था। 1962 में हुए आम चुनावों में 46.6 महिला मतदाताओं ने जबकि 63.3% पुरुषों ने मतदान किया था। बीते 50 सालों में पुरुषों के मतदान के प्रतिशत में 3.8% और महिलाओं के मतदान प्रतिशत में 19% की बढ़ोतरी हुई है। 2014 में हुए आम चुनावों में पुरुषों का मतदान प्रतिशत महिलाओं से मात्र 1.5 फीसदी ज्यादा था।
आंकड़े भी गवाह है कि महिला मतदाताओं का दिल जीते बिना किसी भी पार्टी के लिए सत्ता के सिंहासन की राह आसान नहीं है। लिहाजा हर पार्टी महिला मतदाताओं को लुभाने की रेस में एक दूसरे को पछाड़ने में लगी है।