मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक बहस और नेताओं के नए-नए पैंतरे अब मीडिया में छाए रहेंगे। रैलियां, नारे और लोक लुभावन चुनावी वादे आगे की राजनीति के अहम पहलू होंगे। चुनावी माहौल को देखते हुए हम लोकतंत्र यानी जम्हूरियत को समझाने वाले कुछ चुनिंदा शेर आपकी नजर कर रहे हैं। हमारी इन काव्य पंक्तियों में चुनावी दौर की एक कड़कती आवाज है, जो जम्हूरियत को यह समझाएगी कि सोच समझकर पूरे विवेक के साथ अपना मतदान करें। आपका आज किया मतदान आपके आने वाले पांच सालों की दशा और दिशा करेगा।
सियासत की अपनी अलग इक जबां है
लिखा हो जो इकरार, इनकार पढ़ना
-अज्ञात
नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है
- राहत इंदौरी
झुकाना सीखना पड़ता है सर लोगों के क़दमों में
यूं ही जम्हूरियत में हाथ सरदारी नहीं आती
- अज्ञात
यहां तो सिर्फ गूंगे और बहरे लोग बसते हैं
खुदा जाने यहां पर किस तरह जलसा हुआ होगा
-दुष्यंत कुमार
जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिसमें
बंदों को गिना करते हैं, तौला नहीं करते
-अल्लामा इक़बाल
तो उससे कह दो कि वो आए देख ले आकर
लगाया हमने था जम्हूरियत का जो पौधा
-जावेद अख़्तर
मुझ से क्या बात लिखानी है कि अब मेरे लिए
कभी सोने कभी चांदी के क़लम आते हैं
-बशीर बद्र
दुहाई दे के वो जम्हूरियत की
निज़ाम-ए-ख़्वाब रुस्वा कर रहा है
-मोहम्मद अज़हर शम्स
फिर इस मज़ाक़ को जम्हूरियत का नाम दिया
हमें डराने लगे वो हमारी ताक़त से
-नोमान शौक़
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
-निदा फ़ाज़ली
जम्हूरियत के बीच फंसी अक़्लियत था दिल
मौक़ा जिसे जिधर से मिला वार कर दिया
-नोमान शौक़
जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिसमें
घोड़ों की तरह बिकते हैं इंसान वग़ैरा
- अज्ञात
मेरे सय्याद की तालीम की है धूम गुलशन में
यहां जो आज फंसता है वो कल सय्याद होता है
-अकबर इलाहाबादी
बागबां ने यह अनोखा सितम ईजाद किया
आशियां फूक के पानी को बहुत याद किया
-चकबस्त
किया है मिलने का वादा और वो भी पांचवें दिन का
किसी से सुन लिया होगा कि दुनिया चार दिन की है
-अज्ञात
शायद मुझे निकाल कर पछता रहे हैं आप
महफिल में इस ख्याल से फिर आ गया हूं मैं
-अदम
कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए
कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए
-दुष्यंत कुमार
जो दिल को है ख़बर कहीं मिलती नहीं ख़बर
हर सुबह इक अज़ाब है अख़बार देखना
-उबैदुल्लाह अलीम
जंग में कत्ल सिपाही होंगे
सुर्खरू जिल्ले-इलाही होंगे
-'मौज' रामपुरी