वाम दलों की आखिरी उम्मीद
केरल वाम दलों की आखिरी उम्मीद है, जिसे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने हिला कर रख दिया था। इस राज्य की पांच सीटों पर चुनाव होने हैं। नतीजे तय करेंगे कि क्या मतदाताओं ने वाम राजनीति के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का फैसला कर लिया है।
मप्र-राजस्थान से भी बड़े संकेत
इन दोनों राज्यों में कांग्रेस ने बमुश्किल सरकार बनाई थी। हालांकि, लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया। अब मध्यप्रदेश की एक और राजस्थान की जिन दो सीटों पर उपचुनाव होने हैं, वह सीटें भाजपा और उसके सहयोगी की थी। जाहिर तौर पर अगर कांग्रेस ये सीटें छीनने में कामयाब रही तो उसका मनोबल बढ़ेगा, दूसरी स्थिति में भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल होगा।
बिहार का तिलस्म
बिहार में ऐसे समय में विधानसाभा की पांच सीटों और लोकसभा की एक सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं जब भाजपा और जदयू में तनातनी चल रही है। विधानसभा की चार सीटों पर जदयू तो लोकसभा की एक सीट पर लोजपा का कब्जा था। नीतीश अगर अपनी सीटें बचाने में कामयाब रहे तो उनका कद बढ़ेगा, मगर तब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे राजद की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।