असम के ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित ऐतिहासिक साराईघाट पुल के समानांतर अब एक और रेल सह सड़क (डबल डेकरः पुल बनने जा रहा है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के तहत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। इस नए रेल सह सड़क पुल बनने से असम के गुवाहाटी क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह परियोजना अगठोरी से कामाख्या तक की रेलवे लाइन डबलिंग योजना का हिस्सा है, जिसकी अनुमानित लागत 1,473.77 करोड़ है। इसे दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पुल कुल 7.062 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 1.3 किलोमीटर लंबा स्टील कंपोजिट गर्डर ब्रिज ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जाएगा। इसका डबल-डेकर डिज़ाइन खास होगा, निचले तल पर दोहरी रेलवे लाइन और ऊपरी तल पर तीन-लेन सड़क के साथ फुटपाथ होंगे।
अब तक क्या-क्या हो चुका है
एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने फरवरी 2024 में विस्तृत प्राक्कलन (डिटेल्ड एस्टीमेट) को स्वीकृति दी थी, जबकि मार्च 2025 में डिज़ाइन ड्रॉइंग और रिपोर्ट को अंतिम मंजूरी प्रदान की गई। इस दौरान सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर डिज़ाइन के लिए जरूरी जियोटेक्निकल जांच भी पूरी हो चुकी है। परियोजना के निर्माण के लिए ईपीसी मोड (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) में टेंडर जारी कर दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया के पूरा होते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
कैसा होगा यह नया पुल
शर्मा ने बताया कि यह पुल कुल 7.062 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 1.3 किलोमीटर लंबा स्टील कंपोजिट गर्डर ब्रिज ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जाएगा। इसका डबल-डेकर डिज़ाइन खास होगा, निचले तल पर दोहरी रेलवे लाइन और ऊपरी तल पर तीन-लेन सड़क के साथ फुटपाथ होंगे। उत्तर दिशा की ओर (अगठोरी) से 2.694 किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग होगा। दक्षिण दिशा की ओर (कामाख्या) से 3.07 किलोमीटर का अप्रोच बनाया जाएगा।
इस पुल के बनने से क्या होंगे फायदे
यह पुल न केवल गुवाहाटी क्षेत्र में रेल और सड़क यातायात की क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि उद्योग, पर्यटन और व्यापार को भी गति देगा। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के चलते स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अधिकारी ने बताया, यह पुल मौजूदा साराईघाट पुल का पूरक होगा और पूर्वोत्तर भारत की परिवहन संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। यह परियोजना असम की कनेक्टिविटी और पूर्वोत्तर भारत के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।