हिमंत बिस्वा सरमा, असम के मुख्यमंत्री
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को राज्य में 8 नए सह-जिले बनाने का एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने 'को-डिस्ट्रिक्ट मॉडल' का विस्तार कर रही है, ताकि प्रशासन को लोगों के करीब लाया जा सके और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हो। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अभी असम में 39 सह-जिले काम कर रहे हैं। 8 नए सह-जिले बनने के बाद इनकी कुल संख्या बढ़कर 47 हो जाएगी।
सरकार सह-जिला मॉडल का विस्तार क्यों कर रही है?
सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को विकेंद्रीकृत करना और लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करने से राहत देना है। इस व्यवस्था के तहत कुछ प्रशासनिक और सरकारी काम सह-जिला कार्यालयों के माध्यम से लोगों के नजदीक उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे नागरिक अपने क्षेत्र के आसपास ही सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे और प्रशासन से संपर्क कर सकेंगे।
क्या दूरदराज के लोगों को मिलेगा सीधा फायदा?
असम में कई ऐसे इलाके हैं जहां भौगोलिक परिस्थितियों और कनेक्टिविटी की चुनौतियों के कारण जिला मुख्यालय तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसे में सह-जिला मॉडल के विस्तार से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाएं मिलने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, यह कदम प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और 'ईज ऑफ गवर्नेंस' को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
क्या नए सह-जिलों से सरकारी योजनाओं का काम तेज होगा?
सह-जिला नेटवर्क के विस्तार से स्थानीय स्तर पर अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद है। इसके साथ ही कल्याणकारी और विकास योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार नागरिक-केंद्रित प्रशासन और सरकारी सेवाओं को लोगों के लिए आसान बनाने पर जोर देते रहे हैं।
असम के संरक्षित वन क्षेत्र में कितनी बढ़ोतरी हुई?
असम के संरक्षित वन क्षेत्र में भी बड़ा विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, 2016 से अब तक राज्य के संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में 403.62 वर्ग किलोमीटर भूमि जोड़ी गई है। मुख्यमंत्री ने इस विस्तार को राज्य के संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि जोड़ा गया क्षेत्रफल लगभग जयपुर शहर के बराबर है।
क्या इससे काजीरंगा के संरक्षण को भी फायदा होगा?
मुख्यमंत्री के अनुसार, संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार से काजीरंगा के प्राकृतिक परिदृश्य को अधिक जुड़ा और टिकाऊ बनाने में मदद मिली है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडे के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां हाथी, बाघ, जंगली भैंसे और कई तरह के प्रवासी व स्थानीय पक्षी भी पाए जाते हैं।
क्या वन्यजीव गलियारों को भी मिलेगी मजबूती?
राज्य सरकार संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार के साथ वन्यजीव गलियारों और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर भी जोर दे रही है। 403.62 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के जुड़ने से जैव विविधता वाले इलाकों को अधिक सुरक्षा मिलने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
असम सरकार के अनुसार, विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए संरक्षित क्षेत्रों को मजबूत करना जरूरी है। सह-जिला मॉडल का विस्तार और संरक्षित वन क्षेत्र में बढ़ोतरी, दोनों ही राज्य में प्रशासन और संरक्षण से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।