असम में बाढ़ और उसके प्रभावों को लेकर राज्य सरकार के थिंक टैंक स्टेट इनोवेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन आयोग (SITA) ने एक रिपोर्ट तैयार की है। तैयार 'ग्रामीण असम और वहां के लोगों की आजीविका पर बाढ़ के प्रभाव' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट को शनिवार को असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने जारी किया। इस रिपोर्ट में बाढ़ के प्रभाव और उससे पैदा हुई समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों के बारे में बताया गया है। इसके साथ ही इसमें यह भी बताया गया है कि बाढ़ के कारण अन्य रोजगार के अवसर तलाशने के लिए पलायन करने वालों की संख्या बढ़ी है।
मुख्यमंत्री सरमा ने गुवाहाटी में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि असम सरकार राज्य स्तर पर SITA को नीति आयोग के समान बनाने की कोशिश कर रही है। थिंक टैंक को नीति निर्माण के लिए अधिक विकेंद्रीकृत बनाने के लिए अनुसंधान में असम में विश्वविद्यालयों के साथ ही और लोगों को शामिल करने जा रहे हैं।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बाढ़ के कारण पैदा हुए हालात असम में विकास की नकारात्मकता और लगातार बढ़ रही गरीबी के रूप में सामने आ रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि अगर असम में हर साल आने वाली बाढ़ से पैदा होने वाले हालातों को रोकने के लिए सरकारों द्वारा पर्याप्त उपाय किए गए होते तो असम, मानव विकास सूचकांक (एचडीआई), और राज्य सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के आंकड़ों में शीर्ष पर हो सकता था। इसमें कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए समावेशी और समग्र हस्तक्षेप की जरूरत है।
गौरतलब है कि बाढ़ असम के लिए एक बारहमासी मुद्दा है। ये विशेष रूप से मैदानों में रहने वाले लोगों के एक बड़े समुदाय को प्रभावित करता है। असम में दो प्रमुख नदियां ब्रह्मपुत्र और बराक हैं। इसके अलावा दोनों की दर्जनों सहायक नदियां हैं।
पलायन बना बड़ी समस्या
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के बाढ़ प्रभावित गांवों में काम के लिए लोगों का पलायन एक प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकांश घरों के लिए कृषि प्रमुख व्यवसाय है। ज्यादातर परिवार कृषि कार्यों में लगे हैं। लेकिन, हर साल बाढ़ का सामना करते हुए इन घरों के सदस्य अब आजीविका कमाने के लिए ज्यादातर राज्य के बाहर कृषि से परे किसी भी नौकरी के लिए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में पता चलता है कि 29 फीसदी घरों में ऐसे लोग हैं जो अब अपने गांवों से बाहर काम करते हैं।
बाढ़ प्रेरित संकटों को कम करने के लिए अल्पकालिक उपाय
रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित गांवों और लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए बहुत अधिक मुआवजे के पैकेज की जरूरत है। लेकिन स्थिति को सामान्य करने के लिए सबसे पहले भोजन, पानी, स्वच्छता सुविधाओं और स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत करने की आवश्यकता है।
सर्वे के आधार पर तैयार हुई इस रिपोर्ट को राज्य सरकार के थिंक टैंक स्टेट इनोवेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन आयोग (SITA) ने कॉटन विश्वविद्यालय के साथ मिलकर बनाया था। ग्रामीण असम में बाढ़ की स्थिति और उसके प्रभाव को जानने के लिए सर्वेकर्ताओं ने राज्य के आठ जिलों का दौरा किया। इस दौरान वे 83 गांवों तक पहुंचे। इन सर्वेकर्ताओं ने लगभग 1100 घरों में जाकर लोगों से बातचीत की।