असम में बाढ़ की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। राज्य के 11 जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 95 हजार हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान राज्य की स्थिति से अवत कराया।
पीएम मोदी को दी बधाई
सीएम सरमा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, 'आज प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेने का पूर्ण सौभाग्य मिला। बैठक के दौरान मैंने उन्हें असम में बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी दी और हमारे लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करने के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों से उन्हें अवगत कराया। मैंने चल रहे विकास कार्यों की स्थिति पर भी चर्चा की। असम के लोगों की ओर से मैं एक बार फिर उन्हें ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के लिए हार्दिक बधाई देता हूं।'
98 लोगों की गई जान
बता दें, इस साल बाढ़ में मरने वालों की संख्या 98 हो गई है, जबकि बाढ़, भूस्खलन, तूफान और आकाशीय बिजली गिरने से 113 लोगों की जान गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) बुलेटिन के अनुसार प्रभावित लोग 21 राजस्व सर्किलों के 345 गांवों के हैं। प्रभावित जिलों में मोरीगांव, कामरूप, धेमाजी, कामरूप मेट्रोपॉलिटन, डिब्रूगढ़, शिवसागर, नगांव, गोलाघाट, गोलपारा, जोरहाट और कछार शामिल हैं।
ये जिला हुए सबसे ज्यादा प्रभावित
सबसे बुरी तरह जो जिला प्रभावित हुआ वो नागांव था। यहां करीब 70,280 लोग प्रभावित हुए। इसके बाद गोलाघाट (12,321) और कछार (6,773) था। शनिवार तक 10 जिलों में प्रभावितों की संख्या 1.30 लाख थी। बाढ़ के पानी ने 6,467.5 हेक्टेयर से अधिक फसल भूमि को भी जलमग्न कर दिया। कुल 6,311 लोगों ने 35 राहत शिविरों में शरण ली है।
खतरे के निशान के ऊपर बह रही ब्रह्मपुत्र नदी
बुलेटिन में कहा गया है कि धुबरी में ब्रह्मपुत्र खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि अन्य प्रभावित जिलों में यह घट रही है और खतरे के निशान से नीचे बह रही है। राज्य ने अब तक बाढ़ की दो लहरों का सामना किया है, जिससे राज्य के सभी 35 जिले प्रभावित हुए हैं। इसमें पहली लहर 28 मई से 13 जून तक थी, जबकि चल रही दूसरी लहर 16 जून से शुरू हुई थी।