समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, "23 जून की सुबह मैं अपने परिवार के सदस्यों के साथ सो रहा था और उस समय, बाढ़ के पानी ने तटबंध के एक बड़े हिस्से को तोड़ दिया। बाढ़ का पानी तुरंत हमारे घर में घुस गया। मैंने अपने बच्चों को बुलाया और अन्य साथी ग्रामीणों को सतर्क किया।" उन्होंने आगे कहा, "हम अपनी जान बचाने के लिए तुरंत तटबंध पर पहुंचे और अन्य ग्रामीण भी वहां आए। हम अपने घर के सामान को बाहर निकालने में सक्षम नहीं थे। बाढ़ के पानी ने कई घरेलू सामान को बहा दिया और मेरे घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। मेरे घर के अंदर लगभग 4 फीट पानी था।"
उन्होंने यह भी बताया कि वह एक दिहाड़ी मजदूर हैं और उनका पूरा परिवार उन पर निर्भर है। गगन कहते हैं, 'मेरे पास एक नया घर बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मेरे पास पैसे नहीं हैं। हम कैसे रहेंगे, हम नहीं।' उन्होंने आगे बताया कि सरकार की ओर से उन्हें एक-दो दिनों के लिए राहत सामग्री मिली और कुछ अन्य गैर सरकारी संगठनों ने उनकी मदद की। गगन तालुकदार ही नहीं, बाढ़ के पानी ने गांव के 15 अन्य परिवारों के घरों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया और वे भी वर्तमान में तटबंध पर रह रहे हैं।
एक अन्य ग्रामीण हरिन तालुकदार ने कहा कि बाढ़ के पानी ने उनकी बकरियों को बहा दिया और उनके घर को नुकसान पहुंचाया। हरिन कहते हैं, ''मैं केले का व्यवसाय करने वाला एक छोटा व्यापारी हूं, लेकिन बाढ़ के पानी ने सबकुछ बहा दिया। इस विनाशकारी बाढ़ से पूरा इलाका बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मैंने सब कुछ खो दिया है। मेरे पास कुछ भी नहीं है।''
दीपा तालुकदार नाम की एक अन्य ग्रामीण बताती हैं, ''जब हमने उस रात बाढ़ के बारे में अलर्ट की आवाज सुनी, तो हम अपनी जान बचाने के लिए तटबंध की ओर भागे। बाढ़ ने सबकुछ नष्ट कर दिया। एक स्थानीय यूथ क्लब ने हमारी मदद की और हमें कुछ भोजन व पीने का पानी दिया।'' दीपा बताती हैं, "बाद में स्थानीय विधायक और मंत्री रंजीत कुमार दास ने हमारी मदद की, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। बाढ़ के कारण इस क्षेत्र के सभी घर क्षतिग्रस्त हो गए। हमारे परिवार में छह सदस्य हैं और मेरे पति दिहाड़ी मजदूर हैं। अब हमारे पास जीने के लिए कोई विकल्प नहीं है। कई ग्रामीण अब बीमार महसूस कर रहे हैं।"
एक अन्य ग्रामीण हृदय तालुकदार ने कहा कि बाढ़ ने उनके घर को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है और वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ अब सड़क पर रह रहे हैं। वह कहते हैं, "अगर सरकार हमारी मदद करेगी, तो हम फिर से नए तरीके से अपना जीवन शुरू कर सकते हैं। मैं एक दिहाड़ी मजदूर हूं और मैं अपनी दैनिक मजदूरी का इस्तेमाल करके एक नया घर नहीं बना सकता।"
बजाली जिले और राज्य के अन्य हिस्सों में बाढ़ की स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन 11 जिलों में लगभग 1.56 लाख लोग अभी भी प्रभावित हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की बाढ़ पर रिपोर्ट के मुताबिक, बारपेटा जिले में 87232 लोग प्रभावित हुए हैं, इसके बाद बजाली जिले में 44617 लोग, लखीमपुर जिले में 17086 लोग, नलबाड़ी जिले में 5909 लोग प्रभावित हुए हैं।
23 राजस्व मंडलों के तहत 563 गांव और 3801.63 हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी पानी में डूबी हुई है। बजाली जिले के 48 गांव इस समय पानी में डूबे हुए हैं। पिछले 24 घंटों में बारपेटा जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई। जिला प्रशासन द्वारा स्थापित पांच जिलों में 29 राहत शिविरों में 2,915 बाढ़ प्रभावित लोग अब भी शरण लिए हुए हैं।