चीन के साथ पूर्वी मोर्चे पर तनाव के बीच भारतीय सेना ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब भारतीय सेना के जवान चीनी सेना को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे। भारतीय सेना ने अपने जवानों को चीनी भाषा का प्रशिक्षण देने के लिए तेजपुर विश्वविद्यालय के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। बुधवार को भारतीय सेना और तेजपुर विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि एमओयू के मुताबिक तेजपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इसका प्रशिक्षण देंगे। इस कोर्स की अवधि 16 सप्ताह यानी चार महीने की होगी। भारतीय सेना के जवानों के लिए पाठ्यक्रम असम के तेजपुर विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाएगा। समझौता ज्ञापन पर भारतीय सेना और तेजपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर से 4 कोर, गजराज कोर द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसएन सिंह भी एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में मौजूद थे।
पाठ्यक्रम 16 सप्ताह की अवधि के लिए होगा और तेजपुर विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाएगा। समझौता ज्ञापन पर भारतीय सेना की ओर से मुख्यालय 4 कोर और रजिस्ट्रार प्रो. एसएन सिंह ने कुलपति, तेजपुर विश्वविद्यालय की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। 1994 में स्थापित तेजपुर विश्वविद्यालय अत्यधिक योग्य संकाय के साथ चीनी सहित विदेशी भाषाओं के शिक्षण में अग्रणी है। यह चीनी भाषा पाठ्यक्रम इन-हाउस मंदारिन विशेषज्ञता में सुधार करेगा और सेना के जवानों को स्थिति की मांग के अनुसार चीनी सैन्य कर्मियों के साथ जुड़ने के लिए सशक्त करेगा।
बेहतर चीनी भाषा कौशल के साथ, सेना के जवानों को अपनी बातों को और अधिक सशक्त तरीके से व्यक्त करने के लिए बेहतर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कमांडर स्तर की वार्ता, फ्लैग मीटिंग्स, संयुक्त अभ्यास और सीमा कर्मियों की बैठक आदि जैसे विभिन्न इंटरेक्शन के दौरान चीनी पीएलए की गतिविधियों के बारे में विचारों के बेहतर आदान-प्रदान और उनकी गतिविधियों को समझने में भी मदद करेगा।