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कैंसर के खिलाफ जंग: असम बना नंबर वन, सर्वाइवल दर 62 प्रतिशत; राष्ट्रीय औसत से 22 फीसदी अधिक

Wed, 08 Jul 2026 01:09 AM IST
एन अर्जुन अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी

सार

असम सरकार के अनुसार, राज्य में कैंसर उपचार व्यवस्था को जिला स्तर तक विस्तार देने और बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाने से मरीजों के उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सरकार का दावा है कि कैंसर मरीजों की जीवित रहने की दर राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। लाखों लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान कई मामलों की शुरुआती चरण में पहचान हुई, जिससे समय पर इलाज संभव हुआ।
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असम सरकार ने जारी किए आंकड़े - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में असम ने देश के लिए नई मिसाल कायम की है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि असम में कैंसर मरीजों की जीवित रहने (सर्वाइवल) की दर 62 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे अधिक है। यह राष्ट्रीय औसत 40 प्रतिशत से 22 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य में विकसित विकेंद्रीकृत कैंसर उपचार प्रणाली, व्यापक स्क्रीनिंग अभियान और समय पर इलाज की व्यवस्था को दिया।
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि असम ने कैंसर उपचार को केवल गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे राज्य में अस्पतालों और उपचार केंद्रों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। राज्य में 17 कैंसर अस्पतालों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिनमें से 12 अस्पताल फिलहाल संचालित हैं। इनमें गुवाहाटी का स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, डिब्रूगढ़, बरपेटा, सिलचर और दीफू के व्यापक कैंसर केंद्र तथा लखीमपुर, जोरहाट, दरांग, तेजपुर, कोकराझार, गोलाघाट और तिनसुकिया के डायग्नोस्टिक एवं डे-केयर सेंटर शामिल हैं।

अशोक सिंघल ने बताया कि कैंसर की शुरुआती पहचान पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य सरकार ने 1.24 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक करीब 47 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है, जिससे 900 से अधिक मरीजों में शुरुआती चरण (स्टेज-1 और स्टेज-2) में कैंसर की पहचान हुई है। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे मरीज अक्सर बीमारी के अंतिम चरण में अस्पताल पहुंचते थे, जबकि अब समय रहते इलाज मिलने से उनके स्वस्थ होने और लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ गई है।
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राज्य में जल्द शुरू होगी प्रोटॉन थेरेपीः मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी घोषणा की कि असम जल्द ही देश का पहला राज्य बनेगा, जहां कैंसर मरीजों के लिए प्रोटॉन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध होगी। यह अत्याधुनिक उपचार तकनीक अगले कुछ सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है। प्रोटॉन थेरेपी को कैंसर उपचार की सबसे उन्नत तकनीकों में माना जाता है, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है और जटिल मामलों में बेहतर परिणाम मिलते हैं।

उन्होंने बताया कि मई 2026 तक असम कैंसर केयर नेटवर्क में 2,26,923 मामले पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 71,517 नए कैंसर मरीज शामिल हैं। इस दौरान नेटवर्क के अस्पतालों में 5,85,533 ओपीडी परामर्श, 48,659 मरीजों का भर्ती उपचार, 1,56,973 कीमोथेरेपी सत्र, 17,408 मरीजों को रेडियोथेरेपी, 9,563 बड़ी सर्जरी और एक लाख से अधिक सीटी स्कैन किए गए। विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में मरीजों को निःशुल्क इलाज भी उपलब्ध कराया गया।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि असम के कैंसर उपचार मॉडल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय माना है। बिहार सहित कई राज्यों ने इस मॉडल का अध्ययन भी किया है। उनका कहना था कि मजबूत स्वास्थ्य ढांचे, शुरुआती जांच और मरीजों तक इलाज की आसान पहुंच ने असम को कैंसर उपचार के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना दिया है।

एक नजर में असम का कैंसर मॉडल
  • 62 प्रतिशत कैंसर सर्वाइवल रेट (देश में सबसे अधिक)
  • राष्ट्रीय औसत 40 प्रतिशत
  • 17 कैंसर अस्पतालों का लक्ष्य
  • 12 अस्पताल संचालित
  • 1.24 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य
  • 47 लाख लोगों की जांच पूरी
  • 900 मरीजों में शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान
मई 2026 तक की उपलब्धियां
  • 2,26,923** मामले पंजीकृत
  • 71,517 नए कैंसर मरीज
  • 5,85,533 ओपीडी परामर्श
  • 48,659 मरीज भर्ती
  • 1,56,973 कीमोथेरेपी सत्र
  • 17,408 रेडियोथेरेपी
  • 9,563 बड़ी सर्जरी
  • 1 लाख से अधिक सीटी स्कैन
क्यों खास है असम मॉडल?
  • जिला स्तर तक कैंसर उपचार की सुविधा
  • बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग से शुरुआती पहचान
  • सरकारी योजनाओं के तहत निःशुल्क उपचार
  • जल्द शुरू होगी देश की पहली प्रोटॉन थेरेपी सुविधा
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अन्य राज्यों को भी इस मॉडल का अध्ययन करने की सलाह दी है।
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