हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अनुभव के आधार पर कह रहा हूं कि मुस्लिम भाजपा को वोट नहीं देते। उन्होंने पंचायत व लोकसभा चुनाव में हमें वोट नहीं दिया। विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को वो सीटें नहीं मिलेंगी, जहां इनके वोट ज्यादा हैं, लेकिन हम इन सीटों पर भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे, ताकि जो लोग खुद को मुस्लिम वर्ग से नहीं जोड़ते उन्हें कमल या हाथी (असम गण परिषद का चुनाव चिह्न) का विकल्प मिल सके।
सरमा ने यह भी कहा कि जब तक तलाक, बाल विवाह, बहुविवाह जैसी बातें मुस्लिमों की जिंदगी का हिस्सा हैं, हम उनसे वोट नहीं मांगेंगे। हमारे कुछ कार्यकर्ता उनके बीच से हैं। उनका मनोबल न गिरे इसलिए मुस्लिम बहुल इलाकों में भी उम्मीदवार खड़े करेंगे। बता दें, असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य की करीब 35 फीसदी आबादी मुस्लिम है। ऐसे में राज्य के मंत्री का यह बयान बहुत अहम है।