असम के गुवाहाटी में रातभर हुई भारी बारिश के कारण कई सड़कें और रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए, जिससे मंगलवार को वाहनों की आवाजाही बाधित हुई और शहर के निवासियों को असुविधा हुई। शहर के कुछ इलाकों में लोगों को घुटनों तक पानी से गुजरते देखा गया, जबकि कई इलाकों में पानी का स्तर छाती तक पहुंच गया। वहीं 10 से ज्यादा इलाके जू रोड, नवीन नगर, हाटीगांव, गणेशगुड़ी, गीता नगर, मालीगांव, हिदायतपुर, गुवाहाटी क्लब, उलुबारी, लचित नगर, चांदमारी और पंजाबरी में बाढ़ की खबर है। रातभर हुई बारिश के कारण जीएस रोड जोराबाट, तरुण नगर, जटिया, ज्योतिकुची, घोरामारा, वीआईपी रोड, रुक्मिणी गांव, सर्वे और छत्रीबाड़ी समेत कई इलाकों में जलभराव हो गया।
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शहर में कई स्कूलों में स्थगित की परीक्षाएं
कई स्कूलों, जहां आंतरिक परीक्षाएं चल रही हैं, ने शहर भर में बाढ़ वाले परिसर और सड़कों के कारण सुबह बंद करने की घोषणा की है, क्योंकि अधिकांश स्कूल बसों ने अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं। वहीं कई स्थानों पर जलभराव वाली सड़कों पर कई वाहन फंसे हुए हैं, जबकि मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस भी फंसी हुई हैं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, शहर के लगभग सभी इलाकों से ट्रैफिक जाम की खबरें आईं और सड़कों पर जलभराव के कारण वाहन फंसे रहे।
2-3 दिनों तक असम में खराब मौसम की भविष्यवाणी
वहीं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 2-3 दिनों तक असम में खराब मौसम की भविष्यवाणी की है, जिसमें राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की उम्मीद है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है, '20 मई, 2025 को दर्ज किए गए बारिश के आंकड़ों के अनुसार, गुवाहाटी और उसके आसपास के कई स्थानों पर पहले से ही पर्याप्त बारिश हो चुकी है, जिसमें गुवाहाटी एडब्ल्यूएस स्टेशन पर 112.5 मिमी बारिश शामिल है।' मौसम के पैटर्न से पता चलता है कि आने वाले दिनों में असम के पश्चिमी और दक्षिणी दोनों हिस्सों में और अधिक तीव्र वर्षा होने की संभावना है, जो संभावित रूप से अलग-अलग स्थानों पर 200 मिमी तक पहुंच सकती है।
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गुवाहाटी में जलभराव और आमजन के लिए निर्देश
इसमें कहा गया है कि 'गुवाहाटी में लगातार बारिश से जलभराव बढ़ सकता है, वाहनों की आवाजाही धीमी हो सकती है और संवेदनशील इलाकों में पेड़ गिरने और स्थानीय भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।' बयान में कहा गया है कि नागरिक निकाय के अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को अलर्ट पर रखा जा रहा है। 'लोगों को सभी आवश्यक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। दैनिक यात्रियों और लंबी दूरी के यात्रियों से अनुरोध है कि वे अपनी दिनचर्या तदनुसार योजना बनाएं, तीव्र वर्षा के दौरान अनावश्यक आवाजाही से बचें।'
बाढ़ग्रस्त इलाकों में पहुंचे मंत्री जयंत मल्ला बरुआ
सरकार ने निचले इलाकों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को बाढ़ या मिट्टी के कटाव के किसी भी संकेत के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। इसमें कहा गया है कि 'लोगों से आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने और स्थानीय अधिकारियों की तरफ से जारी की गई सलाह का पालन करने का भी आग्रह किया जाता है ताकि इस लंबे समय तक चलने वाली बारिश के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।' इससे पहले सुबह में, आवास और शहरी मामलों के मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने दोपहिया वाहन पर सवार होकर कुछ बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया।
इस दौरान मंत्री ने कहा, 'गुवाहाटी में कल रात भारी बारिश हुई और आज भी इसके जारी रहने का अनुमान है। हमने मेघालय की पहाड़ियों से आने वाले बारिश के पानी के कारण शहर में अतिरिक्त समस्याएं देखी हैं। हमारे पास कुछ स्लुइस गेट हैं, लेकिन वे पानी के इतने बड़े प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं'। बरुआ ने कहा कि सरकार आवासीय क्षेत्रों से बाढ़ के पानी को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह अभी तक बहुत प्रभावी नहीं है।
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उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के इस रुख को भी दोहराया कि मेघालय स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेघालय ने बाढ़ जिहाद किया, जिसके परिणामस्वरूप राज्य की राजधानी में भारी बाढ़ आई। पिछले साल अगस्त में, सीएम सरमा ने दावा किया था कि विश्वविद्यालय एक मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए नई इमारतों का निर्माण करने के लिए अपने परिसर के अंदर की पहाड़ियों को काट रहा था। यूएसटीएम को विश्वविद्यालय के मालिक और कुलाधिपति महबूबुल हक द्वारा प्रवर्तित किया जाता है, और यह गुवाहाटी के बाहरी इलाके में मेघालय के री-भोई जिले में 9वें मील पर स्थित है।
पिछले साल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई थी फटकार
पिछले साल अगस्त में, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्य की राजधानी में बाढ़ की समस्या से निपटने का समय आ गया है, और सरकार को इस समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है, और संकट को कम करने के लिए एक योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा। यह कहते हुए कि असम सरकार राज्य की राजधानी में बारहमासी जलभराव की समस्या को हल करने में गंभीर नहीं थी, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने अपने बार-बार के नोटिस का जवाब नहीं देने के लिए कड़ी फटकार लगाई और संबंधित चार विभागों पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया।