गुवाहाटी हाईकोर्ट से निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई को करारा झटका लगा है। अदालत ने गुरुवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सीएए विरोधी प्रदर्शनों और माओवादियों से संदिग्ध संबंधों को लेकर निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दे दी। साथ ही हाई कोर्ट ने निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई और उनके तीन सहयोगियों को एनआईए की विशेष अदालत से मिली क्लीनचिट भी खारिज कर दी।
बता दें कि एनआईए ने विशेष अदालत द्वारा अखिल गोगोई को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। जिस पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस सुमन श्याम और जस्टिस मलासरी नंदी की खंडपीठ ने मामले को फिर से खोलने के बाद आरोप तय करने के लिए आगे बढ़ने को कहा है। मामले की दोबारा सुनवाई विशेष एनआईए कोर्ट ही करेगा। गोगोई ने कहा, मुझे और तीन अन्य लोगों को 23 फरवरी को विशेष एनआईए कोर्ट के समक्ष पेश होने को कहा गया है। मैं इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दूंगा।
गौरतलब है कि विशेष एनआईए कोर्ट ने 1 जुलाई, 2021 को गोगोई और उनके तीन सहयोगियों को दिसंबर 2019 में असम में हिंसक नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दौरान हुई हिंसा में उनकी कथित भूमिका के लिए रिहा कर दिया था। इस मामले में अन्य तीन आरोपी ढैज्या कोंवर, बिट्टू सोनोवाल और मानश कोंवर हैं। विधायक गोगोई ने कहा कि उन्हें और तीन अन्य आरोपियों को 23 फरवरी को विशेष एनआईए अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वे हाई कोर्ट के इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगे।
गौरतलब है कि एनआईए सीएए विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े गोगोई के दो मामलों की जांच कर रही थी। उनमें से एक में, विशेष एनआईए अदालत ने उन्हें जमानत दी थी, जिसे गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने भी अप्रैल 2021 में जांच एजेंसी द्वारा चुनौती दिए जाने के बाद बरकरार रखा था। हालांकि वे न्यायिक हिरासत में थे क्योंकि सीएए विरोधी हिंसा से संबंधित दूसरे मामले में उनकी जमानत खारिज कर दी गई थी।